वित्त वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच राज्यों का कुल व्यय 131 प्रतिशत बढ़ा: कैग रिपोर्ट

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वित्त वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच राज्यों का कुल व्यय 131 प्रतिशत बढ़ा: कैग रिपोर्ट

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  • Publish Date - June 16, 2026 / 05:13 PM IST,
    Updated On - June 16, 2026 / 05:13 PM IST

नयी दिल्ली, 16 जून (भाषा) राज्यों का कुल व्यय 2015-16 से 2024-25 के बीच 131 प्रतिशत बढ़ा है। इस दौरान राज्यों ने आर्थिक वृद्धि के साथ तालमेल बनाए रखते हुए कल्याण और विकास गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित किया। कैग की मंगलवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) के. संजय मूर्ति द्वारा जारी ‘राज्य वित्त 2024–25’ रिपोर्ट में कहा गया कि राजस्व व्यय बजट में हावी रहा और कुल खर्च का औसतन 83 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गया, जबकि पूंजीगत व्यय में वृद्धि तो हुई, लेकिन उसका हिस्सा अपेक्षाकृत कम रहा।

रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक एवं आर्थिक सेवाओं पर कुल व्यय का लगभग दो-तिहाई हिस्सा खर्च हुआ, जो राज्यों की कल्याण और विकास पर ध्यान देने की नीति को दर्शाता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि प्रतिबद्ध व्यय और सब्सिडी ने लगातार राजस्व व्यय का आधे से अधिक हिस्सा गया। 2024-25 में यह 53.31 प्रतिशत तक पहुंच गया, जिसमें सब्सिडी में विशेष रूप से तेज वृद्धि देखी गई।

विभिन्न व्यय श्रेणियों में राज्यों का खर्च आठ प्रमुख मदों में केंद्रित रहा। इनमें तीन प्रकार के अनुदान, वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, सब्सिडी और बड़े कार्य शामिल हैं जो कुल खर्च का लगभग 78.46 प्रतिशत और संयुक्त सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का लगभग 12.38 प्रतिशत रहे।

रिपोर्ट ने कहा कि यह राज्यों के बजट में प्रतिबद्ध और अनिवार्य व्यय के वर्चस्व को दर्शाता है।

कुल राज्य व्यय 2015-16 के 22.18 लाख करोड़ रुपये से 131 प्रतिशत बढ़कर 2024-25 में 51.20 लाख करोड़ रुपये हो गया।

रिपोर्ट में कहा गया कि इस अवधि के दौरान खर्च की संरचना में अधिक बदलाव नहीं हुआ और वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान, सब्सिडी तथा अनुदान मिलकर बड़ा हिस्सा लेते रहे।

वित्त वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच राज्यों का बजट व्यय कुल जीएसडीपी के 15.78 प्रतिशत से 17.49 प्रतिशत के बीच रहा।

वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 51.20 लाख करोड़ रुपये के व्यय में सामान्य क्षेत्र का हिस्सा 29.79 प्रतिशत, सामाजिक क्षेत्र का 39 प्रतिशत और आर्थिक क्षेत्र का 28.68 प्रतिशत रहा।

व्यय की संरचना में पूंजीगत निवेश सामान्य क्षेत्र में 5.28 प्रतिशत, सामाजिक क्षेत्र में 31.60 प्रतिशत और आर्थिक क्षेत्र में 62.71 प्रतिशत रहा।

रिपोर्ट में कहा गया कि आर्थिक क्षेत्र (जिसमें बुनियादी ढांचा, उद्योग और व्यापार शामिल हैं) में पूंजीगत निवेश का बड़ा हिस्सा जाता है, जबकि प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों वाला सामान्य क्षेत्र मुख्यतः राजस्व आधारित है।

राज्यों की अपनी कर आय (एसओटीआर) राजस्व प्राप्तियों का सबसे बड़ा घटक रही, जो 49.55 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 50.13 प्रतिशत हो गई। हालांकि, वित्त वर्ष 2024-25 में इसकी वृद्धि दर में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई।

भाषा निहारिका अजय

अजय