( शॉन लाट्श, माइने विश्वविद्यालय)
ओरोनो (अमेरिका), 16 जून (द कन्वरसेशन) पृथ्वी जिस अंतरिक्षीय वातावरण में स्थित है, वह पूरी तरह शांत नहीं है। वैज्ञानिकों के अनुसार हमारा ग्रह सौरमंडल के निर्माण के समय से बचे असंख्य पथरीले और धात्विक मलबे के बीच से लगातार गुजरता है। अधिकांश छोटे कण पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते ही जलकर समाप्त हो जाते हैं और रात के आकाश में चमकते “टूटते तारे” के रूप में दिखाई देते हैं। लेकिन कभी-कभी बड़े या तेज गति से आने वाले पिंड के वायुमंडल में प्रवेश करते ही विस्फोट, तेज चमक और सोनिक बूम जैसी घटनाएं होती हैं, जो लोगों को चौंका देती हैं।
उल्का का सोनिक बूम वह तेज “धमाके जैसी आवाज़” होती है, जो तब सुनाई देती है जब कोई उल्कापिंड पृथ्वी के वायुमंडल में बहुत तेज गति से प्रवेश करता है और ध्वनि की गति से भी तेज चलता है।
हाल ही में 30 मई 2026 को अमेरिका के मैसाचुसेट्स और न्यू हैम्पशायर की सीमा क्षेत्र में एक तेज धमाके जैसी आवाज ने लोगों को हिला दिया। यह आवाज इतनी तेज थी कि इसे पूर्वी अमेरिका के कई हिस्सों में महसूस किया गया। बाद में नासा के वैज्ञानिक विश्लेषण में यह पुष्टि हुई कि यह घटना एक छोटे उल्कापिंड के पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने और उसके टूटने से हुई थी।
नासा के अनुसार, यह उल्का लगभग 3 से 5 फुट (लगभग 1 से 2 मीटर) व्यास का था। यह लगभग 42,000 मील प्रति घंटे (करीब 68,000 किलोमीटर प्रति घंटे) की गति से पृथ्वी की ओर आ रहा था। उल्का और लगातार घनी होती हवा के बीच के घर्षण ने, आसमान से तेज़ी से गुज़र रही उस चट्टान की गतिज ऊर्जा को बहुत जल्दी अत्यधिक गर्मी में बदल दिया।
वैज्ञानिकों के अनुसार, लगभग 40 मील (करीब 60 किलोमीटर) की ऊंचाई पर यह पिंड पूरी तरह संरचनात्मक रूप से टूट गया और एक तेज विस्फोट हुआ। इस विस्फोट में लगभग 300 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा मुक्त हुई। यही ऊर्जा आगे चलकर हवा में ‘शॉक वेव’ के रूप में फैल गई, जिसे सोनिक बूम कहा जाता है। जब कोई वस्तु ध्वनि की गति (761 मील प्रति घंटे या 1,225 किलोमीटर प्रति घंटे) से तेज चलती है, तो वह अपने आगे हवा को दबाकर एक शक्तिशाली तरंग पैदा करती है।
इस घटना में उल्का का अधिकांश हिस्सा वायुमंडल में ही जलकर नष्ट हो गया, जबकि बचा हुआ मलबा केप कॉड बे में सुरक्षित रूप से गिर गया। विशेषज्ञों के अनुसार ऐसी घटनाएं पृथ्वी पर अपेक्षाकृत सामान्य हैं, लेकिन उनके बहुत छोटे और अल्पकालिक होने के कारण पहले इन्हें अक्सर दर्ज नहीं किया जा पाता था। आज के समय में डैशकैम, सुरक्षा कैमरे, डिजिटल डोरबेल और स्मार्टफोन जैसे उपकरणों के कारण इन घटनाओं का रिकॉर्ड तुरंत मिल जाता है, जिससे वैज्ञानिकों को उनका अध्ययन करना आसान हो गया है।
खगोलविदों का कहना है कि ये घटनाएं हमें यह समझने में मदद करती हैं कि पृथ्वी एक सक्रिय अंतरिक्षीय वातावरण में स्थित है, जहां लगातार छोटे-बड़े पिंड प्रवेश करते रहते हैं। हालांकि, ये घटनाएं देखने में डरावनी लग सकती हैं, लेकिन ज्यादातर मामलों में इनसे कोई वास्तविक खतरा नहीं होता।
हाल के महीनों में पृथ्वी के विभिन्न हिस्सों में कई ऐसे उल्का देखे गए हैं, जिससे कुछ वैज्ञानिकों ने इसे “सक्रिय उल्का मौसम” जैसा नाम भी दिया है। मार्च 8 से 11 के बीच उत्तरी यूरोप में कई धीमी गति से चलने वाले चमकदार आग के गोले देखे गए। बाद में वैज्ञानिकों ने इनमें से कुछ टुकड़ों का अध्ययन किया और पाया कि वे वेस्टा (क्षुद्रग्रह) से संबंधित थे। वेस्टा को सौरमंडल के प्रारंभिक समय का एक अत्यंत पुराना और लगभग अपरिवर्तित पिंड माना जाता है, जिससे वैज्ञानिकों को सौरमंडल के इतिहास को समझने में मदद मिलती है।
इसी क्रम में 17 मार्च को लेक एरी के ऊपर एक और बड़ा उल्का प्रवेश करता देखा गया। यह लगभग 7 टन वजनी पिंड था, जो 45,000 मील प्रति घंटे (72,400 किलोमीटर प्रति घंटे) की गति से वायुमंडल में घुसा। इसने दिन के समय आसमान में तेज चमक पैदा की और तीव्र सोनिक बूम हुआ। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस घटना में लगभग 250 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा मुक्त हुई, और इसके कुछ टुकड़े बाद में वैज्ञानिकों द्वारा बरामद किए गए।
चार दिन बाद 21 मार्च को टेक्सास में एक और उल्का देखा गया, जिसका आकार लगभग 3 फुट था। यह 35,000 मील प्रति घंटे की गति से वायुमंडल में दाखिल हुआ और लगभग 26 टन टीएनटी के बराबर ऊर्जा छोड़ी। इस घटना ने एक घर की छत में लगभग 6 इंच का छेद कर दिया, और एक छोटा अंतरिक्षीय टुकड़ा घर के अंदर गिर गया।
वैज्ञानिकों का कहना है कि उल्काओं से सीधे खतरे की संभावना अत्यंत कम है। पृथ्वी पर प्रतिदिन टन के हिसाब से अंतरिक्षीय धूल गिरती है, जो वायुमंडल में जलकर सुंदर प्रकाश रेखाओं के रूप में दिखाई देती है।
फिर भी, जब बड़े उल्का पृथ्वी के करीब आते हैं या वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो वे वैज्ञानिकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण अध्ययन का अवसर प्रदान करते हैं। ये घटनाएं सौरमंडल के निर्माण, ग्रहों की उत्पत्ति और अंतरिक्षीय मलबे की संरचना को समझने में मदद करती हैं।
वैज्ञानिकों और शोध संस्थानों ने लोगों से अपील की है कि यदि वे किसी बड़े उल्का या चमकदार आग के गोले को देखें, तो इसकी सूचना अमेरिकन मेटियोर सोसाइटी जैसी संस्थाओं को दें। इससे वैज्ञानिक इन घटनाओं का रिकॉर्ड बनाकर पृथ्वी और अंतरिक्ष के बीच संबंधों को और बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
द कन्वरसेशन
मनीषा दिलीप
दिलीप