नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) भारतीय ध्वज वाले दो और एलपीजी टैंकर युद्धग्रस्त होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर गये हैं और दो से ढाई दिन में भारतीय बंदरगाह पर पहुचेंगे।
एलपीजी टैंकर पाइन गैस और जग वसंत जलडमरूमध्य को पार करने से पहले सोमवार सुबह फारस की खाड़ी से रवाना हुए। दोनों एक-दूसरे के करीब चल रहे हैं। इन जहाजों पर लदी गैस देश में लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है। जहाजों की आवाजाही पर नजर रखने से जुड़े आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि दोनों जहाज पर लगभग 92,000 टन एलपीजी है। उन्होंने कहा, ‘‘यात्रा शुरू हो चुकी है।’’
उन्होंने अंतिम गंतव्य बंदरगाह का खुलासा किए बिना बताया कि खाड़ी से भारत तक पहुंचने में जहाज को आमतौर पर दो से ढाई दिन लगते हैं।
जहाज ट्रैकिंग आंकड़ों से पता चलता है कि संभवतः जलडमरूमध्य को पार करने से पहले ईरानी अधिकारियों को अपनी पहचान स्पष्ट करने के लिए दोनों एलपीजी टैंकर ईरान के लारक और क्वेशम द्वीपों के बीच के जलक्षेत्र से होकर गुजरे।
ये दोनों जहाज उन 22 भारतीय झंडे वाले जहाज में शामिल हैं जो पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद फारस की खाड़ी में फंस गए थे। इसका कारण युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य का लगभग बंद होना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान और ओमान के बीच का संकरा जलमार्ग है जो तेल और गैस उत्पादक खाड़ी देशों को शेष विश्व से जोड़ता है।
इससे पहले, लगभग 92,712 टन एलपीजी ला रहे एमटी शिवालिक और एमटी नंदा देवी सुरक्षित रूप से भारतीय तट पर पहुंच चुके हैं। यह देश की लगभग एक दिन की खाना पकाने की गैस की खपत के बराबर है।
अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमले और ईरान के पलटवार के बाद पश्चिम एशिया में बनाव बढ़ गया है। उस समय होर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय ध्वज वाले 28 भारतीय जहाज मौजूद थे। इनमें से 24 जलडमरूमध्य के पश्चिमी हिस्से में और चार पूर्वी हिस्से में थे। पिछले कुछ दिन में, दोनों तरफ से दो-दो जहाज सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य तक पहुंचने में सफल रहे हैं।
एलपीजी ला रहा जहाज शिवालिक 16 मार्च को गुजरात के मुंदड़ा बंदरगाह पहुंचा। वहीं एक अन्य एलपीजी टैंकर नंदा देवी, अगले दिन गुजरात के कांडला बंदरगाह पर पहुंचा। दोनों एलपीजी वाहक जहाजों ने 13 मार्च को अपनी यात्रा शुरू की थी और 14 मार्च की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया था।
संयुक्त अरब अमीरात से 80,886 टन कच्चे तेल से लदा भारतीय ध्वज वाला तेल टैंकर जग लाडकी 18 मार्च को मुंदड़ा बंदरगाह पहुंचा था। एक अन्य टैंकर, जग प्रकाश जो तंजानिया जा रहा था, पहले ही सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य को पार कर चुका है। यह ओमान से अफ्रीका के लिए गैसोलीन ले जा रहा था।
युद्ध क्षेत्र में बचे हुए 24 भारतीय झंडे वाले जहाजों में से 22 जलडमरूमध्य के पश्चिमी भाग में हैं, जिनमें 611 नाविक सवार हैं, जबकि दो पूर्वी भाग में हैं।
सिन्हा ने कहा कि इन जहाजों पर सवार 11 नाविक भारत लौट चुके हैं। इससे जहाजों पर सवार नाविकों की संख्या घटकर 600 रह गई है।
पश्चिमी भाग में फंसे भारतीय ध्वज वाले जहाजों में से मूल रूप से छह एलपीजी वाहक थे। एक तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) टैंकर है, चार कच्चे तेल के टैंकर, एक रासायनिक उत्पादों का परिवहन कर रहा है, तीन कंटेनर जहाज हैं और दो बल्क यानी थोक सामान की ढुलाई करने वाले हैं। इसके अतिरिक्त, एक ड्रेजर है, एक खाली है और तीन नियमित रखरखाव के लिए बंदरगाह पर हैं।
उन्होंने बताया कि खाली जहाज में एलपीजी भर दी गई है। इससे खाना पकाने की गैस से भरे जहाजों की संख्या सात हो गई है।
पाइन गैस और जग वसंत के सफलतापूर्वक रवाना होने के बाद, पश्चिमी तट पर जहाजों की संख्या घटकर 20 रह गयी है। इनमें पांच एलपीजी वाहक शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि एलएनजी जहाज पेट्रोनेट एलएनजी लि. ने किराये पर लिया है, जबकि एलपीजी वाहक मुख्य रूप से भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) जैसी पेट्रोलियम विपणन कंपनियों द्वारा किराये पर लिए गए हैं। कच्चे तेल के टैंकर इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. और बीजीएन इंटरनेशनल ने किराये पर लिए हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमारा अंतिम लक्ष्य क्षेत्र में फंसे अपने सभी जहाजों को सुरक्षित मार्ग दिलाना है। जब तक सुरक्षित मार्ग सुनिश्चित नहीं हो जाता, हमारे नाविकों का कल्याण और सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है।’’
कुल मिलाकर, लगभग 500 टैंकर जहाज फारस (अरब) की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रासायनिक/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं।
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान संभवत: सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से जाने की अनुमति दे सकता है।
उनका कहना है कि यह एक सत्यापन प्रक्रिया लगती है। इसके तहत ईरान यह पुष्टि करता है कि स्वामित्व, माल और जहाज अमेरिका के तो नहीं हैं या उन देशों के हैं जिन्हें ईरान ने पारगमन की अनुमति दी है।
भारत अपने कच्चे तेल का लगभग 88 प्रतिशत, प्राकृतिक गैस का 50 प्रतिशत और एलपीजी का 60 प्रतिशत आयात करता है। युद्ध शुरू होने से पहले, भारत द्वारा आयात किए जाने वाले कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा सऊदी अरब, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों से आता था। इन क्षेत्रों से आने वाले जहाज जलडमरूमध्य का उपयोग करते हैं।
एलपीजी का लगभग 85-95 प्रतिशत और गैस का 30 प्रतिशत इसी जलडमरूमध्य से आता है। हालांकि, कच्चे तेल की आपूर्ति में आई रुकावट की भरपाई रूस, पश्चिम अफ्रीका, अमेरिका और लातिनी अमेरिका जैसे वैकल्पिक स्रोतों से आंशिक रूप से की गई है, लेकिन औद्योगिक और वाणिज्यिक उपयोगकर्ताओं को गैस और एलपीजी की आपूर्ति में कटौती हुई है।
भाषा रमण अजय
अजय