नयी दिल्ली, 23 मार्च (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के उस निर्णय को रद्द करने के आदेश को बरकरार रखा, जिसमें भारतीय स्की एवं स्नोबोर्ड के कार्यों को संभालने के लिए एक तदर्थ समिति नियुक्त की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले को चुनौती देने वाली आईओए की अपील पर सुनवाई करते हुए, हालांकि उस निर्देश को निरस्त कर दिया, जिसमें संघ को चुनाव कराने के लिए नियुक्त निर्वाचन अधिकारी की फीस का भुगतान करने को कहा गया था।
खंडपीठ ने कहा कि भारतीय स्की एवं स्नोबोर्ड को ही यह भुगतान करना होगा, क्योंकि एक स्वतंत्र संस्था के चुनाव कराने का खर्च आईओए पर डालना उचित नहीं है।
एकल पीठ ने 10 फरवरी को भारतीय स्की एवं स्नोबोर्ड की उस याचिका को स्वीकार किया था, जिसमें आईओए अध्यक्ष द्वारा 13 अक्टूबर 2023 को तदर्थ समिति के गठन के आदेश को चुनौती दी गई थी।
एकल पीठ ने कहा था कि भारतीय स्की एवं स्नोबोर्ड एक स्वतंत्र निकाय है और आईओए के पास उसकी कार्यकारिणी को हटाकर तदर्थ समिति नियुक्त करने का अधिकार नहीं है।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि वह एकल पीठ के निर्णय से ‘पूरी तरह सहमत’ है।
खंडपीठ ने यह भी उल्लेख किया कि, स्वीकार्य रूप से, भारतीय स्की एवं स्नोबोर्ड खेल संहिता या राष्ट्रीय खेल शासन अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल महासंघ नहीं है।
अदालत ने कहा कि कर्नाटक सोसायटी पंजीकरण अधिनियम के तहत पंजीकृत एक सोसायटी होने के नाते इसके कार्यों का संचालन केवल इसके ‘मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन’, उपनियमों और लागू नियमों व विनियमों के अनुसार ही किया जाएगा।
अदालत ने कहा, “हम उस निर्णय और आदेश को बरकरार रखते हैं, जिसमें 13 अक्टूबर 2023 के कार्यालय आदेश को रद्द किया गया, तदर्थ समिति को तत्काल प्रभाव से भंग घोषित किया गया और प्रतिवादी संख्या ‘एक (भारतीय स्की एवं स्नोबोर्डिंग)’ के चुनाव कराने का निर्देश दिया गया था, लेकिन निर्वाचन अधिकारी की फीस के भुगतान का निर्देश निरस्त किया जाता है। यह फीस प्रतिवादी संख्या ‘एक’ द्वारा अदा की जाएगी।”
भाषा
आनन्द नरेश
नरेश