धोखाधड़ी रोकने के लिए एआई का व्यापक इस्तेमाल कर रहा यूआईडीएआई: चेयरमैन

धोखाधड़ी रोकने के लिए एआई का व्यापक इस्तेमाल कर रहा यूआईडीएआई: चेयरमैन

धोखाधड़ी रोकने के लिए एआई का व्यापक इस्तेमाल कर रहा यूआईडीएआई: चेयरमैन
Modified Date: September 9, 2026 / 09:48 pm IST
Published Date: September 9, 2026 9:48 pm IST

मुंबई, नौ सितंबर (भाषा) ‘आधार’ जारी करने वाले भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के चेयरमैन नीलकंठ मिश्रा ने बुधवार को कहा कि संस्था धोखाधड़ी का पता लगाने और उसे रोकने के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) का व्यापक इस्तेमाल कर रही है।

मिश्रा ने वित्तीय प्रौद्योगिकी सम्मेलन ‘ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026’ के एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि धोखाधड़ी करने वालों और प्राधिकरण के बीच ‘आंख-मिचौली’ का खेल चल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘धोखाधड़ी करने वाले लगातार अधिक चालाक हो रहे हैं, लेकिन हम भी अधिक स्मार्ट हो रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि यूआईडीएआई धोखाधड़ी का पता लगाने के लिए बड़े पैमाने पर एआई का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण ने एआई के चर्चित होने से काफी पहले ही चेहरे और अंगूठे के निशान के लिए ‘जीवंतता की जांच’ (लाइवनेस टेस्ट) शुरू कर दिए गए थे।

मिश्रा ने कहा कि आधार प्रमाणीकरण की संख्या तेजी से बढ़ी है। जब उन्होंने यूआईडीएआई की वार्षिक रिपोर्ट के लिए पहली बार अपनी टिप्पणी लिखी थी, तब रोजाना करीब सात करोड़ प्रमाणीकरण होते थे, जो अब बढ़कर 10 करोड़ हो गए हैं।

यूआईडीएआई चेयरमैन ने कहा कि बैंकिंग से लेकर दूरसंचार तक विभिन्न सेवाओं के लिए लोगों को ऑनलाइन अपनी पहचान स्थापित करने की जरूरत होती है। उन्होंने बताया कि 600 से अधिक संस्थाएं इस समय आधार का इस्तेमाल कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि प्राधिकरण रोजाना 25-30 करोड़ आधार प्रमाणीकरण संभालने के लिए अपने बुनियादी ढांचे को तैयार कर रहा है।

अगले तीन वर्षों के संभावित बदलावों के बारे में पूछे जाने पर मिश्रा ने कहा कि ‘एजेंटिक’ एआई इस्तेमाल के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोग प्रमाणीकरण की प्रक्रिया का काम एआई एजेंट को सौंप सकते हैं, जिससे ऐसे उपयोग के मामले सामने आ सकते हैं जिनकी अभी कल्पना कर पाना भी मुश्किल है।

इस बीच, यूआईडीएआई ने बुधवार को ‘आधार फेस ऑथेंटिकेशन एसडीके’ किट और ‘आधार चेहरा प्रमाणीकरण सैंडबॉक्स’ पेश किया। इनसे संबंधित संस्थाओं को अपने डिजिटल अनुप्रयोगों में आधार से चेहरा प्रमाणीकरण को अधिक आसानी से एकीकृत, परीक्षण और लागू करने में मदद मिलेगी।

यूआईडीएआई के अनुसार, फेस ऑथेंटिकेशन एसडीके उसकी चेहरा प्रमाणीकरण सुविधा को सीधे एंड्रॉयड और आईओएस अनुप्रयोगों में जोड़ता है। इससे उपयोगकर्ताओं को प्रमाणीकरण के लिए एक ऐप से दूसरे ऐप में जाने की जरूरत नहीं होगी।

यूआईडीएआई ने कहा कि यह सॉफ्टवेयर विकास किट (एसडीके) एकीकृत करने की प्रक्रिया को आसान बनाता है और इसमें एआई/मशीन लर्निंग आधारित ‘जीवंतता’ तथा फर्जी पहचान रोकने की क्षमता शामिल है। यह प्रमाणीकरण संबंधी आंकड़ों के सुरक्षित प्रबंधन और एन्क्रिप्शन की सुविधा भी देता है।

‘आधार फेस ऑथेंटिकेशन सैंडबॉक्स’ संगठनों को उत्पादन स्तर पर लागू करने से पहले पूरी प्रमाणीकरण प्रक्रिया को सुरक्षित एवं नियंत्रित वातावरण में एकीकृत करने, उसका परीक्षण करने और सत्यापन करने की सुविधा देता है।

प्राधिकरण ने कहा कि सैंडबॉक्स में उपयोगकर्ता पंजीकरण और सहमति, चेहरा दर्ज करने, जीवंतता जांच, प्रमाणीकरण, त्रुटि प्रबंधन और प्रतिक्रिया सत्यापन जैसी प्रक्रियाओं का परीक्षण किया जा सकता है। इसके लिए बाहरी बायोमेट्रिक उपकरण की जरूरत नहीं होगी।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


लेखक के बारे में