UPI MDR News: ‘हमें भी मिले MDR का हिस्सा…’ UPI पर फिनटेक कंपनियों ने MDR को लेकर उठाई आवाज, सरकार से कर दी ये बड़ी मांग

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UPI MDR News: पेमेंट एग्रीगेर्टर अब UPI कारोबार में बैंकों पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। इसके लिए वे मर्चेंट से जुड़े शुल्क में सीधे हिस्सेदारी की मांग कर रहे हैं। कंपनियों ने सरकार से कहा है कि UPI शुल्क में उनका हिस्सा कानूनन तय किया जाए, ताकि उनकी कमाई का मॉडल मजबूत हो सके।

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  • Publish Date - August 28, 2026 / 07:30 PM IST,
    Updated On - August 28, 2026 / 07:32 PM IST

(UPI MDR News/ Image Credit: AI-generated)

HIGHLIGHTS
  • UPI MDR में तय हिस्सा चाहती हैं फिनटेक कंपनियां।
  • बैंकों पर निर्भरता कम करने की मांग।
  • अभी हिस्सेदारी का कोई तय फॉर्मूला नहीं।

नई दिल्ली: UPI MDR News: पेमेंट एग्रीगेटर्स अब UPI से होने वाले ट्रांजैक्शन पर मिलने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) में अपने लिए (UPI MDR News) तय हिस्सा चाहते हैं। कंपनियों का कहना है कि उन्हें अपनी कमाई के लिए पार्टनर बैंकों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। फिलहाल फीस से मिलने वाले रेवेन्यू का बंटवारा बैंक और पेमेंट कंपनियों के बीच आपसी समझौते से होता है। अब फिनटेक कंपनियां चाहती हैं कि सरकार इस हिस्सेदारी को लेकर स्पष्ट नियम बनाए।

अभी कैसे होता है फीस का बंटवारा?

मौजूदा व्यवस्था में डिजिटल पेमेंट पर लगने वाला शुल्क सबसे पहले इश्यूइंग बैंक के पास जाता है। यानी जिस बैंक के खाते या कार्ड (UPI MDR News) का इस्तेमाल ग्राहक करता है, उसे फीस का बड़ा हिस्सा मिल सकता है। इसके बाद बैंक अपने कमर्शियल समझौते के अनुसार पेमेंट एग्रीगेटर को कुछ रकम देता है। Razorpay, Cashfree और Paytm जैसे प्लेटफॉर्म मर्चेंट की ओर से पेमेंट प्रोसेस करने में अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन उन्हें मिलने वाली हिस्सेदारी पहले से तय नहीं होती।

फिनटेक कंपनियां क्यों चाहती हैं हिस्सा?

पेमेंट कंपनियों का कहना है कि मर्चेंट को प्लेटफॉर्म से जोड़ने से लेकर KYC, सुरक्षा और पेमेंट गेटवे का पूरा सिस्टम चलाने में उनका बड़ा खर्च होता है। इसके बावजूद MDR से मिलने वाली कमाई के लिए उन्हें बैंकों के फैसले पर निर्भर रहना पड़ता है। बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर्स के बीच हिस्सेदारी को लेकर फिलहाल कोई तय फॉर्मूला नहीं है। बड़े बैंक कई बार कंपनियों को कम हिस्सा देते हैं, जिससे फिनटेक कंपनियों की कमाई प्रभावित होती है।

सरकार से नियम तय करने की मांग

फिनटेक कंपनियों का तर्क है कि पेमेंट सिस्टम (UPI MDR News) का तकनीकी ढांचा, मर्चेंट ऑनबोर्डिंग और कई जरूरी अनुपालन का काम वे संभालती हैं। इसलिए उन्हें MDR में एक तय हिस्सा मिलना चाहिए। कंपनियां चाहती हैं कि सरकार नियम बनाकर उनकी हिस्सेदारी पहले से निर्धारित करे, ताकि रेवेन्यू के लिए बैंकों के साथ हर बार अलग बातचीत न करनी पड़े। अगर सरकार इस मांग पर कोई व्यवस्था बनाती है तो UPI पेमेंट से जुड़े कारोबार के मौजूदा रेवेन्यू मॉडल में बदलाव देखने को मिल सकता है।

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पेमेंट एग्रीगेटर्स की मुख्य मांग क्या है?

पेमेंट एग्रीगेटर्स चाहते हैं कि UPI के MDR में उनका एक तय हिस्सा कानूनन निर्धारित किया जाए।

अभी MDR की रकम किसे मिलती है?

मौजूदा व्यवस्था में डिजिटल ट्रांजैक्शन की फीस पहले इश्यूइंग बैंक के पास जाती है। इसके बाद बैंक समझौते के अनुसार पेमेंट एग्रीगेटर को हिस्सा देता है।

फिनटेक कंपनियां बैंकों पर निर्भर क्यों नहीं रहना चाहतीं?

कंपनियों का कहना है कि मर्चेंट जोड़ने, KYC, सुरक्षा और पेमेंट सिस्टम चलाने पर उनका खर्च होता है, लेकिन कमाई के लिए उन्हें बैंकों के फैसले पर निर्भर रहना पड़ता है।

क्या MDR में हिस्सेदारी का कोई तय नियम है?

नहीं, बैंकों और पेमेंट एग्रीगेटर्स के बीच हिस्सेदारी फिलहाल आपसी कमर्शियल बातचीत के आधार पर तय होती है।