(UPI Transaction Charges/ Image Credit: AI-generated)
नई दिल्ली: UPI Transaction Charges: देश में UPI के जरिए हर दिन करोड़ों लोग डिजिटल पेमेंट (UPI Transaction Charges) करते हैं। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई थी कि अब UPI से भुगतान करने पर ग्राहकों को भी अतिरिक्त शुल्क देना पड़ सकता है। इस मामले पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR ग्राहकों पर लागू नहीं होता। उन्होंने बताया कि UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों को पेमेंट के लिए MDR शुल्क नहीं देना पड़ता है।
MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक ऐसा शुल्क है जो डिजिटल पेमेंट (UPI Transaction Charges) स्वीकार करने वाले व्यापारियों से लिया जाता है। यह शुल्क बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और अन्य डिजिटल भुगतान संस्थानों के बीच बांटा जाता है। इसका इस्तेमाल डिजिटल पेमेंट सिस्टम को बेहतर बनाने, नई तकनीक विकसित करने और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने में किया जाता है। वित्त मंत्री ने साफ किया कि MDR का सीधा संबंध ग्राहकों से नहीं है।
वित्त मंत्री ने बताया कि UPI और डिजिटल पेमेंट सेवाओं में MDR को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। इस पर फैसला नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की UPI और सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी की सिफारिशों के आधार पर लिया जाएगा। फिलहाल UPI पेमेंट करने वाले आम यूजर्स के लिए कोई नया चार्ज लागू नहीं किया गया है।
सरकार ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill 2026 को मंजूरी दी है। इसके जरिए Payment and Settlement Systems Act 2007 में बदलाव का प्रावधान किया गया है। इस संशोधन से केंद्र सरकार को यह अधिकार मिलेगा कि वह भविष्य में इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर शुल्क से जुड़े नियम तय कर सके। हालांकि, यह बिल किसी नए शुल्क की घोषणा नहीं करता है और न ही UPI पर MDR लागू करता है।
UPI ग्राहकों के लिए फिलहाल कोई बदलाव नहीं हुआ है। वित्त मंत्री ने कहा कि MDR व्यापारियों से जुड़ा मामला है और इसका मकसद डिजिटल भुगतान (UPI Transaction Charges) व्यवस्था को मजबूत बनाना है। सरकार की ओर से अगर भविष्य में कोई नया नियम लागू किया जाता है तो उसकी जानकारी आधिकारिक घोषणा के जरिए दी जाएगी। तब तक यूजर्स पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के UPI पेमेंट कर सकते हैं।