नयी दिल्ली, 24 फरवरी (भाषा) घुलनशील उर्वरक उद्योग संघ (एसएफआईए) ने गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की जबरन बिक्री – जिसे आमतौर पर ‘टैगिंग’ के रूप में जाना जाता है – पर रोक लगाने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले का मंगलवार को स्वागत किया और इसे ‘दूरदर्शी पहल’ बताया।
उत्तर प्रदेश सरकार ने नौ जनवरी, 2026 से पूर्वव्यापी प्रभाव से सब्सिडी वाली उर्वरक बेचने के लिए अधिकृत कंपनियों द्वारा गैर-सब्सिडी वाले उर्वरकों की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है।
यह निर्णय ‘टैगिंग’ प्रथाओं के बारे में किसानों की शिकायतों को हल करता है, जहां कंपनियां कथित तौर पर यूरिया जैसे आवश्यक सब्सिडी वाले उर्वरकों के साथ-साथ गैर-सब्सिडी वाली वस्तुओं की खरीद के लिए मजबूर करती हैं।
एसएफआईए के अध्यक्ष राजीब चक्रवर्ती ने कहा कि सुधार से उर्वरक वितरण में निष्पक्षता बढ़ेगी और किसानों को उनकी फसल और मिट्टी की जरूरतों के अनुकूल उत्पाद चुनने का अधिकार मिलेगा।
इससे एमएसएमई निर्माताओं, आयातकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए प्रतिस्पर्धा के समान अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और कृषि में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बयान में कहा, ‘‘हमने लगातार एक संतुलित और प्रतिस्पर्धी बाजार माहौल की वकालत की है जहां सभी अंशधारकों को समान अवसर मिले।’’
चक्रवर्ती ने इस उपाय को शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही को श्रेय दिया और उम्मीद जताई कि अन्य राज्य भी इसका अनुपालन करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘देश भर में इसी तरह के सुधार किसान-केंद्रित और पारदर्शी कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में काफी मदद करेंगे।’’
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