मुंबई, 24 फरवरी (भाषा) महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए गए कैंसर जांच अभियान के नतीजों से संकेत मिलता है कि मुंबई में बढ़ते प्रदूषण का स्तर फेफड़ों के कैंसर में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जो पहचान किए गए मामलों में से 57 प्रतिशत है। राज्य सरकार ने मंगलवार को विधानसभा में यह जानकारी दी।
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने बताया कि महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में चिंताजनक रुझान देखने को मिल रहा है, और शुरुआती पहचान में देरी ने समग्र रूप से बढ़ते मामलों में योगदान दिया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने कैंसर की जांच और उपचार सुविधाओं का विस्तार करने तथा कैंसर के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए तालुका, जिला और राज्य स्तर पर त्रिस्तरीय स्वास्थ्य सेवा प्रणाली स्थापित करने का निर्णय लिया है।
कैंसर के बढ़ते मामलों का मुद्दा विधायक सुनील प्रभु द्वारा ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से उठाया गया। उन्होंने सरकार से टाटा के साथ-साथ सरकारी और निजी अस्पतालों में उपचार सुविधाओं को मजबूत करने के लिए तत्काल धनराशि उपलब्ध कराने का आग्रह किया।
प्रभु के साथ-साथ अमीन पटेल, सुलभा खोडके, बाबासाहेब देशमुख, किशोर पाटिल, भास्कर जाधव, राजकुमार बडोले, समीर कुनावर और देवयानी फरांडे सहित कई सदस्यों ने कैंसर रोगियों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताई।
आबिटकर ने बताया, ‘‘जन स्वास्थ्य विभाग द्वारा संचालित कैंसर जांच अभियान में महाराष्ट्र भर में 1,677 रोगियों का पता चला। निष्कर्षों से पता चला कि मुंबई में बढ़ते प्रदूषण का स्तर फेफड़ों के कैंसर में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है, जिनकी हिस्सेदारी कुल पहचाने गए मामलों में 57 प्रतिशत है।’’
भाषा धीरज सुरेश
सुरेश