नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) अमेरिका और ईरान के बीच हुए युद्धविराम के बाद बुधवार को भारत के ऊर्जा परिदृश्य में सुधार की उम्मीद जगी है। इस घटनाक्रम से कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारे के जरिये आपूर्ति सामान्य होने की संभावना बढ़ गई है।
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता और चौथा सबसे बड़ा गैस उपयोगकर्ता है। देश अपनी जरूरत का लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल, 50 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और करीब 60 प्रतिशत एलपीजी का आयात करता है।
इस आयातित कच्चे तेल का आधे से अधिक हिस्सा, लगभग 40 प्रतिशत प्राकृतिक गैस और 85-90 प्रतिशत एलपीजी खाड़ी देशों से मंगवाई जाती है। यह आपूर्ति होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरती है, जो पश्चिम एशिया संघर्ष के कारण बंद था।
अब अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के सशर्त युद्धविराम पर सहमत हुए हैं, जिसमें जहाजों की आवाजाही के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना भी शामिल है।
खाड़ी देशों से आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत ने शुरू में होटल और रेस्तरां जैसे वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों को होने वाली एलपीजी आपूर्ति में कटौती की थी, लेकिन अब संकट-पूर्व की तुलना में 70 प्रतिशत आपूर्ति बहाल कर दी गई है।
इसी तरह, परिवहन के लिए सीएनजी और घरों में पाइप वाली रसोई गैस (पीएनजी) की मांग पूरी करने के लिए उर्वरक संयंत्रों सहित अन्य उद्योगों की गैस आपूर्ति में कटौती की गई थी।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण उर्वरक संयंत्रों को अब औसत खपत की 95 प्रतिशत आपूर्ति दी जा रही है। साथ ही, एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए होटल और रेस्तरां जैसे वाणिज्यिक संस्थानों को पीएनजी कनेक्शन देने को प्राथमिकता दी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत युद्धविराम के बाद निर्बाध नौवहन की उम्मीद कर रहा है। जहाजों के गुजरने के लिए शुल्क मांगने की खबरों पर उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर ईरान के साथ कोई चर्चा नहीं हुई है।
भाषा पाण्डेय अजय
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