TET Exam Controversy MP : TET हुआ अनिवार्य तो फूटा शिक्षकों का गुस्सा! राजधानी की सड़कों पर किया प्रदर्शन, सरकार को इस तारीख तक का दिया अल्टीमेटम

Ads

मध्य प्रदेश में TET अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का विरोध तेज हो गया है। भोपाल से लेकर बालाघाट तक शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं और 18 अप्रैल को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

TET Exam Controversy MP / Image Source : IBC24

HIGHLIGHTS
  • TET आदेश के विरोध में भोपाल में शिक्षकों ने पैदल मार्च निकालकर DPI पहुंचकर प्रदर्शन किया।
  • शिक्षकों ने कहा कि कोई भी शिक्षक TET परीक्षा नहीं देगा।
  • 18 अप्रैल को प्रदेशव्यापी बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

भोपाल: TET Exam Controversy MP मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में शिक्षकों और सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। अपनी मांगों को लेकर भारी संख्या में शिक्षक सड़कों पर उतर आए हैं। यह विरोध प्रदर्शन सरकार द्वारा जारी TET (शिक्षक पात्रता परीक्षा) के आदेश के खिलाफ है। शिक्षकों ने साफ कर दिया है कि वे इस नए नियम को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने इसे तुरंत निरस्त करने की मांग की है।

Bhopal Teacher Protest 18 अप्रैल को व्यापक स्तर पर आंदोलन

जानकारी के अनुसार, शिक्षकों ने राजधानी की सड़कों पर पैदल मार्च निकाला और लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) पहुंचे। प्रदर्शनकारी शिक्षकों का कहना है कि कोई भी शिक्षक TET परीक्षा नहीं देगा। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि TET परीक्षा संबंधी आदेश को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। शिक्षकों ने अब 18 अप्रैल की तारीख तय करते हुए व्यापक स्तर पर एक बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी दी है।

Teachers Strike Bhopal बालाघाट में भी शिक्षकों ने निकाली रैली

गौरतलब है कि भोपाल में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद अब बालाघाट के शिक्षक भी TET की अनिवार्यता खत्म करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए हैं। शिक्षकों ने न केवल परीक्षा का विरोध किया, बल्कि सेवा अवधि पहली नियुक्ति से जोड़ने की भी मांग की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

इन्हे भी पढ़ें:-

शिक्षक TET आदेश का विरोध क्यों कर रहे हैं?

शिक्षकों का कहना है कि नई TET अनिवार्यता उनके लिए अन्यायपूर्ण है और इसे वापस लिया जाना चाहिए।

प्रदर्शन कहाँ-कहाँ हुआ?

भोपाल के साथ-साथ बालाघाट में भी शिक्षकों ने रैली निकालकर विरोध दर्ज कराया।

आगे शिक्षकों की क्या रणनीति है?

यदि आदेश वापस नहीं लिया गया तो 18 अप्रैल को बड़ा आंदोलन किया जाएगा।