नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सोमवार को कर्जग्रस्त जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (जेएएल) के अधिग्रहण के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज को चुने जाने के खिलाफ दायर वेदांता समूह की याचिकाओं पर सुनवाई 16 अप्रैल तक के लिए स्थगित कर दी।
मामले की सुनवाई कर रही पीठ की संरचना में बदलाव और एक सदस्य की अनुपलब्धता के कारण मामला अब बृहस्पतिवार को सुना जाएगा।
एनसीएलएटी इस मामले में वेदांता समूह के वकील की अंतिम दलीलें सुनने वाला था, जिसके बाद ऋणदाताओं और समाधान पेशेवर को अपनी प्रस्तुतियां शुरू करनी थीं।
हालांकि, पक्षकारों के साथ चर्चा के बाद एनसीएलएटी ने कार्यवाही स्थगित करते हुए मामले को 16 अप्रैल के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
शुक्रवार को पिछली सुनवाई के दौरान वेदांता ने ऋणदाताओं की समिति (सीओसी) द्वारा अपनाए गए मूल्यांकन मानदंडों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि वेदांता से 3,400 करोड़ रुपये कम बोली लगाने वाली अदाणी एंटरप्राइजेज को चुनना ‘व्यावसायिक समझ’ के दायरे से बाहर है।
वेदांता ने राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की इलाहाबाद पीठ के 17 मार्च के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें जेपी एसोसिएट्स के अधिग्रहण के लिए अदाणी एंटरप्राइजेज की 14,535 करोड़ रुपये की बोली को मंजूरी दी गई थी।
इससे पहले 24 मार्च को एनसीएलएटी ने एनसीएलटी के आदेश पर अंतरिम रोक देने से इनकार करते हुए कहा था कि अधिग्रहण योजना अंतिम फैसले के अधीन रहेगी।
इस अंतरिम आदेश को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गई लेकिन वेदांता को वहां से भी राहत नहीं मिली। हालांकि, किसी बड़े नीतिगत फैसले से पहले न्यायाधिकरण की अनुमति लेने को कहा गया।
जेएएल को कर्ज देने वाले संस्थानों की समिति ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि बोली का मूल्यांकन केवल राशि के आधार पर नहीं, बल्कि नकद भुगतान, व्यवहार्यता और क्रियान्वयन जैसे कई मानकों पर किया गया है।
जेपी समूह की प्रमुख कंपनी को जून, 2024 में 57,185 करोड़ रुपये के कर्ज चूक के बाद दिवाला प्रक्रिया में भेजा गया था। कंपनी के पास रियल एस्टेट, सीमेंट, बिजली, होटल एवं अवसंरचना क्षेत्र से जुड़ी कई परिसंपत्तियां हैं।
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