नयी दिल्ली, 16 मार्च (भाषा) दाल, आलू, मछली जैसे खाने के सामान और अन्य वस्तुओं के दाम में तेजी से थोक मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 11 महीने के उच्चतम स्तर 2.13 प्रतिशत पर रही। हालांकि, मासिक आधार पर इस दौरान सब्जियों की कीमतों में नरमी आई। सोमवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
यह लगातार चौथा महीना है जब थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) आधारित मुद्रास्फीति में तेजी आई है। यह इस साल जनवरी में 1.81 प्रतिशत जबकि पिछले साल फरवरी में 2.45 प्रतिशत थी।
अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि जारी रहती है, तो थोक महंगाई में और तेजी आ सकती है और इसका असर अन्य वस्तुओं (उर्वरक, एल्युमीनियम) पर भी पड़ेगा। इसका कारण यह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक की तुलना में अंतरराष्ट्रीय कीमतों के अधिक करीब है।
डब्ल्यूपीआई आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में खाद्य पदार्थों की महंगाई 2.19 प्रतिशत रही, जबकि पिछले महीने यह 1.55 प्रतिशत थी।
हालांकि, सब्जियों की महंगाई फरवरी में घटकर 4.73 प्रतिशत हो गई, जबकि जनवरी में यह 6.78 प्रतिशत थी। लेकिन दाल, आलू, अंडे, मांस और मछली की मुद्रास्फीति में फरवरी में वृद्धि देखी गई।
उद्योग मंत्रालय ने बयान में कहा, ‘‘मुख्य रूप से अन्य विनिर्मित वस्तुओं, मूल धातुओं के विनिर्माण, गैर-खाद्य वस्तुओं, खाद्य वस्तुओं और वस्त्र आदि की कीमतों में वृद्धि के कारण थोक मुद्रास्फीति बढ़ी।’’
ईंधन तथा ऊर्जा श्रेणी में मुद्रास्फीति में गिरावट फरवरी में भी जारी रही और यह 3.78 प्रतिशत रही जो जनवरी में 4.01 प्रतिशत थी। वैश्विक तेल के दाम फरवरी में औसतन 68 डॉलर प्रति बैरल रहे, जो जनवरी में 63 डॉलर प्रति बैरल थे।
बार्कलेज ने रिपोर्ट में कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष से कच्चे तेल की कीमतों में हुई वृद्धि का असर खुदरा मुद्रास्फीति की तुलना में थोक मुद्रास्फीति में अधिक दिखेगा। इसका कारण खुदरा ईंधन की कीमतों में कोई वृद्धि नहीं हुई है।
बार्कलेज ने कहा, ‘‘16 मार्च तक कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गयी है। इसका प्रभाव थोक मुद्रास्फीति के मार्च के आंकड़ों में दिखेगा।’’
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च का कहना है कि अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर मार्च, 2026 से थोक मुद्रास्फीति पर पड़ेगा। जब तक आपूर्ति पक्ष की समस्याएं हल नहीं हो जातीं, इसमें वृद्धि बनी रह सकती है।
विनिर्मित उत्पादों के मामले में थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 2.92 प्रतिशत हो गई जो इससे पिछले महीने 2.86 प्रतिशत थी।
गैर-खाद्य वस्तुओं की श्रेणी में मुद्रास्फीति बढ़कर फरवरी में 8.80 प्रतिशत हो गई जो जनवरी में 7.58 प्रतिशत थी।
उद्योग मंडल पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर जोखिमों को देखते हुए, आपूर्ति श्रृंखला की दक्षता में सुधार, लॉजिस्टिक लागत में कमी, घरेलू विनिर्माण को समर्थन और उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर नीतिगत ध्यान केंद्रित करना लागत के दबाव को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण है।
पिछले सप्ताह जारी आंकड़ों के अनुसार, देश में खुदरा मुद्रास्फीति फरवरी में बढ़कर 3.2 प्रतिशत हो गई, जो जनवरी में 2.75 प्रतिशत थी।
मुद्रास्फीति कम रहने के कारण भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बीते वर्ष में नीतिगत ब्याज दर रेपो में 1.25 प्रतिशत की कमी की है। आरबीआई मौद्रिक समीक्षा के समय मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है।
भाषा रमण अजय
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