Fall in Crude Oil Prices: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, तो क्या अब घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम या फिर करना होगा इंतजार!
Fall in Crude Oil Prices: अमेरिका और ईरान के बीच संभावित वार्ता से कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई है और ब्रेंट 95 डॉलर से नीचे आ गया है। इससे वैश्विक बाजर को राहत मिली है, लेकिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में सप्लाई रुकावट की आशंका से भविष्य को लेकर अनिश्चितता बरकरार है।
(Fall in Crude Oil Prices/ Image Credit: IBC24 News)
- कच्चे तेल की कीमतें गिरकर 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंचीं
- अमेरिका-ईरान बातचीत की खबर से बाजार में राहत
- स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में सप्लाई अब भी प्रभावित
नई दिल्ली: Fall in Crude Oil Prices: मिडिल ईस्ट में लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच अब शांति की उम्मीदों ने कच्चे तेल के भाव ने बाजार को थोड़ी राहत दी है। हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत दोबारा शुरू होने की खबर आई है, जिससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। इसका सीधा असर वैश्विक बाजार पर भी देखने को मिला है।
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट
शांति वार्ता की उम्मीदों के चलते क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट आई है। ब्रेंट क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया और लगभग 94 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा। वहीं WTI क्रूड में भी करीब 1% की गिरावट दर्ज की गई। पिछले कुछ हफ्तों से तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही थीं, ऐसे में यह गिरावट बाजार के लिए बड़ी राहत भरी मानी जा रही है।
सप्लाई पर अभी पूरी तरह सामान्य नहीं
हालांकि, हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। दुनिया के महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अब भी जहाजों की आवाजाही प्रभावित है। पहले जहां बड़ी संख्या में जहाज इस रास्ते से गुजरते थे, अब वह संख्या कम हो गई है। इससे सप्लाई को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है और बाजार अभी भी सतर्क नजर आ रहा है।
तेल कंपनियों के शेयरों में तेजी
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का फायदा तेल कंपनियों के शेयरों में देखने को मिला है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम के शेयर में लगभग 5.75% की तेजी आई और यह 369.50 रुपये के उच्च स्तर तक पहुंच गया। भारत पेट्रोलियम के शेयर भी करीब 5.10% उछलकर 307.90 रुपये के इंट्रा-डे हाई तक पहुंच गया। इसके अलावा इंडियन ऑयल के शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई। जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
आगे क्या हो सकता है असर
विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतें 90 से 95 डॉलर के बीच बनी रहती हैं, तो तेल पर निर्भर सेक्टर को राहत मिलती रहेगी। साथ ही अमेरिका के इन्वेंट्री डेटा और मिडिल ईस्ट की स्थिति पर भी बाजार की नजर बनी हुई है। फिलहाल तेल बाजार पूरी तरह जियोपॉलिटिकल घटनाओं पर निर्भर है, इसलिए निवेशकों को सोच-समझकर फैसले लेने की जरूरत है।
नोट:-शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन होता है। शेयरों, म्यूचुअल फंड्स और अन्य वित्तीय साधनों की कीमतें बाजार की स्थितियों, आर्थिक परिस्थितियों और अन्य कारकों के आधार पर घट-बढ़ सकती हैं। इसमें पूंजी हानि की संभावना भी शामिल है। इस जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य जागरूकता बढ़ाना है और इसे निवेश या वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।
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