तरजीही दर की पेशकश के बाद ही अमेरिका के साथ व्यापार करार को अंतिम रूप देंगे : गोयल

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तरजीही दर की पेशकश के बाद ही अमेरिका के साथ व्यापार करार को अंतिम रूप देंगे : गोयल

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  • Publish Date - September 3, 2026 / 04:21 PM IST,
    Updated On - September 3, 2026 / 04:21 PM IST

नयी दिल्ली, तीन सितंबर (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) का अंतिम प्रारूप भारत के प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले अमेरिका के तरजीही शर्तों की पेशकश करने पर ही घोषित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि भारत के नौ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) ऐसे देशों के साथ हैं, जिनका कुल सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) करीब 60 लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर है। ये समझौते वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही पहुंच उपलब्ध कराएंगे।

गोयल ने कहा कि भारत अगले कुछ महीनों और दो-तीन वर्षों में कनाडा, मेक्सिको, चिली, मर्कोसुर, एसएसीयू (दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ), जीसीसी (खाड़ी सहयोग परिषद) और इजराइल के साथ भी एफटीए करेगा। इसके साथ ही आसियान, दक्षिण कोरिया और जापान के साथ मौजूदा व्यापार समझौतों की समीक्षा के प्रयासों से भारत को वैश्विक व्यापार के 75 प्रतिशत हिस्से तक अपने प्रतिस्पर्धियों से कम दर पर पहुंच मिलेगी।

भारत… ब्रिटेन, मॉरीशस, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ व्यापार समझौते लागू कर चुका है।

उन्होंने वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित मुक्त व्यापार समझौतों पर एक कार्यशाला में कहा, “न्यूजीलैंड के साथ व्यापार समझौता जल्द लागू होगा और उसके बाद 27 देशों के समूह यूरोपीय संघ के साथ एफटीए भी लागू होगा। जैसे ही अमेरिका हमारे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में हमें तरजीही दर देने में सक्षम होगा, हम बीटीए को अंतिम रूप देंगे और इसका अंतिम प्रारूप घोषित करेंगे।”

भारत और अमेरिका ने फरवरी में समझौते के पहले चरण के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी, लेकिन अमेरिका में शुल्क व्यवस्था में बदलाव के कारण दोनों देशों के बीच इस समझौते पर आगे बातचीत हो रही है।

अमेरिका ने 24 जुलाई से भारत समेत कई देशों के उत्पादों पर अतिरिक्त 10 प्रतिशत शुल्क लगाया है।

गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका की यात्रा करेंगे। वह मिल्वॉकी (अमेरिकी राज्य विस्कॉन्सिन का शहर) में जी-20 व्यापार मंत्रिस्तरीय बैठक में शामिल होने के साथ अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे। बातचीत में व्यापार समझौते से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से शामिल होंगे।

दो दिवसीय मंत्रिस्तरीय बैठक 30 सितंबर से शुरू होगी। अमेरिका के पास 2026 में जी-20 की अध्यक्षता है।

श्रीलंका, बांग्लादेश, थाइलैंड, कंबोडिया, वियतनाम, इंडोनेशिया और मलेशिया समेत कई देश अमेरिकी बाजार में भारत के प्रमुख प्रतिस्पर्धी हैं।

इन देशों की तुलना में शुल्क में मिलने वाला लाभ अमेरिकी बाजार में भारतीय वस्तुओं को कीमत के मामले में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।

भारत ने 2025-26 में अमेरिका को करीब 87 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया।

यहां ‘एफटीए का लाभ उठाने के लिए राष्ट्रीय कार्यशाला’ को संबोधित करते हुए गोयल ने भारत के व्यापार को दुनियाभर में बढ़ाने और बेहतर बाजार पहुंच का लाभ देशभर के कारोबारियों तक पहुंचाने के लिए एफटीए का अधिकतम इस्तेमाल करने की दिशा में केंद्रित, समावेशी और राष्ट्रव्यापी प्रयास का आह्वान किया।

दिनभर चली इस कार्यशाला में केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारी, निर्यात संवर्धन परिषद और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य भारत के बढ़ते व्यापार समझौता नेटवर्क को निर्यातकों, खासकर सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) और पहली बार निर्यात करने वालों के लिए ठोस परिणामों में बदलना था।

गोयल ने कहा कि शुल्क की वास्तविक दर उतनी महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि उसे प्रतिस्पर्धी देशों की दरों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

कपड़ा उद्योग का उदाहरण देते हुए गोयल ने कहा कि भारत को वर्षों से बांग्लादेश और वियतनाम के साथ प्रतिस्पर्धा करने में मुश्किल आती रही है। बांग्लादेश को सबसे कम विकसित देश (एलडीसी) का दर्जा और वियतनाम को एफटीए का लाभ मिला हुआ था, जिससे उन्हें विकसित बाजारों में शून्य या कम शुल्क पर पहुंच मिलती थी, जबकि भारत को अधिक शुल्क का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने कहा कि अब स्थिति बदल गई है और लगभग सभी विकसित बाजारों में भारत ने प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर शुल्क दरें हासिल कर ली हैं।

गोयल ने उद्योग से बड़े पैमाने पर उत्पादन, गुणवत्ता, ग्राहकों का भरोसा बनाए रखने और समय पर ऑर्डर की आपूर्ति पर ध्यान देने को कहा।

उन्होंने कहा, “अब पूरी तरह से गेंद हमारे पाले में है।”

गोयल ने कहा कि भारत ने चालू वर्ष के लिए एक लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर का निर्यात लक्ष्य तय किया है। चालू वर्ष के पहले चार महीनों में निर्यात करीब 317 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जबकि पिछले साल अप्रैल-जुलाई में यह 280 अरब अमेरिकी डॉलर था।

उन्होंने कहा कि मौजूदा रुझान अच्छा संकेत है और वृद्धि को बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया।

मंत्री ने कहा कि जहां भी होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण समस्या पैदा होती है, वहां खासकर छोटे निर्यातकों को मदद देने के उपाय तलाशे जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि अब से चार साल बाद 2030 तक भारत को कई साल पहले तय किए गए दो लाख करोड़ अमेरिकी डॉलर के निर्यात लक्ष्य को हासिल करने की मंशा रखनी चाहिए।

गोयल ने कहा कि अगले 100 ‘भव्य’ औद्योगिक पार्क में निर्यातकों को प्राथमिकता के आधार पर सहायता दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि अधिक निवेश और उत्पादन की प्रतिबद्धता जताने वाले निर्यातकों को आवंटन में रियायतें दी जाएंगी। साथ ही निर्यातकों के लिए ‘प्लग-एंड-प्ले’ कारोबार के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

‘प्लग-एंड-प्ले’ ऐसी कारोबार व्यवस्था है जिसमें उद्यमियों को व्यवसाय या कारखाना लगाने के लिए सड़क, बिजली, पानी, इंटरनेट और तैयार शेड जैसी बुनियादी सुविधाओं सहित सरकारी स्वीकृतियां पहले से ही मिल जाती हैं।

गोयल ने कहा कि प्रत्येक राज्य को उन उत्पादों और औद्योगिक समूहों की पहचान करनी चाहिए, जिन्हें एफटीए से पहले ही लाभ मिल रहा है और जहां इन समझौतों का लाभ अभी पूरी तरह नहीं उठाया जा रहा है। इससे सरकार यह आकलन कर सकेगी कि किस तरह की सहायता दी जा सकती है।

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि निर्यातकों को इन व्यापार समझौतों का लाभ उठाना चाहिए क्योंकि इनमें बड़े अवसर उपलब्ध हैं।

उन्होंने कहा, “हालांकि, हमें यह ध्यान रखना होगा कि एफटीए के जरिये हमारे सामने खुल रहा अवसर असीमित अवधि के लिए नहीं है।”

उन्होंने कहा कि किसी समय भारत के प्रतिस्पर्धी देश भी व्यापार समझौते करेंगे और उन्हें भी उस बाजार में इसी तरह के लाभ मिलेंगे।

उन्होंने कहा, “इसलिए हमें इस समय का प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करना होगा, क्योंकि अगर हम इस अवसर का लाभ उठाने का समय गंवा देते हैं तो शायद हम यह अवसर भी गंवा देंगे।”

भारत करीब 12,300 शुल्क मदों या उत्पाद श्रेणियों में कारोबार करता है और इनमें से ज्यादातर मद किसी न किसी रूप में भारत के व्यापार समझौतों के दायरे में आती हैं।

अग्रवाल ने कहा, “इन सभी खुले बाजारों की एक प्रमुख विशेषता यह भी है कि वहां गुणवत्ता के मानक अधिक ऊंचे होंगे। अगर हमें यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के बाजारों का वास्तव में लाभ उठाना है तो वहां गुणवत्ता के मानक अधिक ऊंचे होंगे।”

उन्होंने कहा कि पांच से 10 साल की इस अवधि का इस्तेमाल नई आपूर्ति श्रृंखलाएं तैयार करने और इन एफटीए को वास्तविक कारोबार में बदलने के लिए करना जरूरी है।

भाषा निहारिका अजय

अजय