नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों की संस्था एनआईटीईएस ने सोमवार को श्रम मंत्री मनसुख मांडविया को लिखित शिकायत दर्ज कर विप्रो लिमिटेड पर 250 से अधिक नव-चयनित कर्मचारियों को कई महीने बाद भी काम पर नहीं रखने का आरोप लगाया।
इस संबंध में टिप्पणी के लिए आईटी कंपनी विप्रो को भेजे गए ईमेल का पीटीआई-भाषा को फिलहाल कोई जवाब नहीं मिला है।
आईटी कर्मचारियों के निकाय ने एक बयान में कहा कि केंद्र सरकार से मामले में हस्तक्षेप करने और विप्रो से स्पष्ट जवाब तलब करने का आग्रह किया गया है।
इसमें यह भी कहा गया है कि कंपनी को सभी प्रभावित उम्मीदवारों को स्पष्ट लिखित जानकारी देनी चाहिए, चाहे वह नियुक्ति की निश्चित तारीख की पुष्टि हो या कारण सहित समापन।
एनआईटीईएस की शिकायत में कहा गया है कि प्रभावित उम्मीदवार विभिन्न राज्यों में विप्रो की तरफ से संचालित ‘टर्बो’ और ‘नेक्स्टजेन टैलेंट हायरिंग’ कार्यक्रम के तहत चयनित किए गए थे।
शिकायत के मुताबिक, इन उम्मीदवारों को मई, 2025 में चयन की पुष्टि करने वाले आशय पत्र जारी किए गए थे जिनमें पद, वेतन और नौकरी शुरू करने से संबंधित प्रक्रिया का विवरण था।
कई मामलों में कंपनी ने औपचारिक ऑनबोर्डिंग सूचना भी भेजी थी जिसमें नौकरी शुरू करने की तारीख, कार्य स्थान और दस्तावेज पूरा करने की प्रक्रिया शामिल थी। इसके बावजूद, उम्मीदवारों को निर्धारित समय पर शामिल नहीं किया गया, जबकि उन्होंने पृष्ठभूमि सत्यापन समेत सभी शर्तें पूरी कर ली थीं।
एनआईटीईएस ने कहा, ‘उम्मीदवारों को लंबे समय तक अनिश्चित प्रतीक्षा, सामान्य जवाब और बदलती व्याख्याओं के बीच छोड़ा गया। कई उम्मीदवारों को कॉलेज परिसर भर्ती नियमों के कारण अन्य नौकरी के अवसर स्वीकार करने से रोक दिया गया, जबकि कई युवाओं ने इस दौरान दूसरी नौकरी की पेशकश ठुकरा दी।’
कर्मचारी संगठन के मुताबिक, कंपनी की तरफ से कोई जवाब न आने का नतीजा यह हुआ कि कई उम्मीदवार छह से आठ महीने तक बेरोजगार रहे हैं जिससे उन पर वित्तीय दबाव और मानसिक तनाव बढ़ा।
संस्था ने अपने पत्र में चयनित उम्मीदवारों को अनिश्चितकाल तक रोककर अन्य उम्मीदवारों को काम पर रखने को ‘अन्यायपूर्ण भर्ती प्रथा और सेवा में कमी’ बताया है।
एनआईटीईएस ने कहा कि यदि इस मामले में सरकार के स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आईटी उद्योग में सामान्य प्रथा बन सकती है और भारत के युवा कार्यबल को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा सकती है।
भाषा प्रेम प्रेम रमण
रमण