नयी दिल्ली, 16 जनवरी (भाषा) सूचना प्रौद्योगिकी सेवा कंपनी विप्रो का वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ सात प्रतिशत घटकर 3,119 करोड़ रुपये रहा। यह गिरावट नई श्रम संहिता के लागू होने के कारण 302.8 करोड़ रुपये के एकमुश्त अस्थायी प्रावधान के कारण आई है।
बेंगलुरु स्थित कंपनी का 2024-25 की तीसरी (अक्टूबर-दिसंबर) तिमाही में शुद्ध लाभ 3,353.8 करोड़ रुपये रहा था।
कंपनी ने शुक्रवार को बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में विप्रो की परिचालन आय 5.5 प्रतिशत बढ़कर 23,555.8 करोड़ रुपये हो गई जबकि गत वित्त वर्ष 2024-25 की इसी अवधि में यह 22,318.8 करोड़ रुपये थी।
तिमाही आधार पर विप्रो का मुनाफा 3.9 प्रतिशत घटा जबकि राजस्व में 3.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
विप्रो के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) एवं प्रबंध निदेशक (एमडी) श्रीनि पल्लिया ने कहा, ‘‘ तीसरी तिमाही में हमने अपनी अपेक्षाओं के अनुरूप व्यापक वृद्धि दर्ज की। जैसे-जैसे कृत्रिम मेधा (एआई) एक रणनीतिक अनिवार्यता बनता जा रहा है ‘विप्रो इंटेलिजेंस’ एक विशिष्ट भूमिका निभा रहा है। इसने इस तिमाही में भी कई सफलताओं में योगदान दिया है। हमने अपने एआई-सक्षम मंचों और समाधानों को अपनाया। ‘विंग्स’ और ‘वेगा’ के माध्यम से एआई-आधारित सेवाओं का विस्तार किया और वैश्विक स्तर पर अपने नवाचार नेटवर्क को बढ़ाया है।’’
इसकी टीसीएस, इन्फोसिस और एचसीएलटेक जैसी बड़ी प्रतिद्वंद्वी कंपनियों के तीसरी तिमाही के नतीजों में भी नए श्रम संहिता के लागू होने का महत्वपूर्ण प्रभाव दिखा है।
टीसीएस को वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में नए श्रम संहिता के लागू होने से 2,128 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ जबकि इन्फोसिस ने 1,289 करोड़ रुपये का नुकसान उठाया।
एचसीएलटेक ने भी कार्यान्वयन से संबंधित 8.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग 719 करोड़ रुपये) के एकमुश्त प्रावधान की जानकारी दी है।
भाषा निहारिका रमण
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