नयी दिल्ली, आठ अप्रैल (भाषा) नीति आयोग की एक रिपोर्ट कहती है कि देश में महिला कर्जदारों के पास 76 लाख करोड़ रुपये का ऋण पोर्टफोलियो है। यह 2025 तक कुल प्रणालीगत ऋण का 26 प्रतिशत है और 2017 के बाद से इसमें 4.8 गुना की वृद्धि हुई है।
आयोग ने रिपोर्ट में कहा कि दिसंबर 2017 से दिसंबर 2025 के बीच महिला कर्जदारों की संख्या नौ प्रतिशत की वार्षिक दर से बढ़ी। इस दौरान महिलाओं के बीच ऋण पहुंच 19 प्रतिशत से बढ़कर 36 प्रतिशत हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, ”महिलाओं पर कुल बकाया ऋण 2017 के 16 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025 में 76 लाख करोड़ रुपये हो गया। भारत में लगभग 45 करोड़ ऋण के लिए पात्र महिलाओं के साथ इस क्षेत्र में और विस्तार की काफी संभावनाएं हैं।”
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि यह वृद्धि खासकर वाणिज्यिक ऋण खंड में रही है। वर्ष 2022 और 2025 के बीच महिला व्यावसायिक कर्जदारों के ऋण में 31 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई, जबकि कुल वाणिज्यिक ऋण 17 प्रतिशत की दर से बढ़ा।
आयोग ने सूक्ष्म वित्त कर्जदारों के व्यक्तिगत खुदरा और वाणिज्यिक ऋणों की ओर झुकाव का भी उल्लेख किया। इस समय 19 प्रतिशत सक्रिय सूक्ष्म वित्त संस्थान (एमएफआई) कर्जदारों के पास व्यक्तिगत या वाणिज्यिक ऋण हैं।
महिलाओं की ऋण पहुंच का भौगोलिक दायरा भी बढ़ रहा है। दक्षिणी और पश्चिमी राज्यों के साथ ही बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे उत्तरी राज्यों में भी वृद्धि देखी जा रही है।
रिपोर्ट कहती है, ”व्यक्तिगत और स्वर्ण ऋण सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले उत्पाद बने हुए हैं, जबकि आवास ऋण में उत्साहजनक वृद्धि देखी जा रही है, जो महिलाओं के बीच संपत्ति का स्वामित्व बढ़ने का संकेत है।”
भाषा पाण्डेय प्रेम
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