प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महिलाओं का बढ़ा आत्मविश्वास, नेतृत्व की राह में अब भी बाधाएं

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प्रौद्योगिकी क्षेत्र में महिलाओं का बढ़ा आत्मविश्वास, नेतृत्व की राह में अब भी बाधाएं

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  • Publish Date - March 8, 2026 / 04:24 PM IST,
    Updated On - March 8, 2026 / 04:24 PM IST

नयी दिल्ली, आठ मार्च (भाषा) युवा महिलाएं कृत्रिम मेधा (एआई) जैसे उभरते क्षेत्रों को आकार देने के लिए अभूतपूर्व आत्मविश्वास के साथ प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं, लेकिन उन्हें नेतृत्व की भूमिकाओं तक पहुंचाने के लिए कॉरपोरेट भारत को कार्यस्थल प्रणालियों को तत्काल फिर से डिजाइन करना चाहिए।

देश की शीर्ष महिला अधिकारियों ने यह बात कही। उन्होंने मध्यम स्तर पर महिलाओं के करियर को खत्म होने से रोकने की जरूरत पर भी जोर दिया।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर भारतीय प्रौद्योगिकी और कॉरपोरेट जगत की दिग्गज महिलाओं के बीच एक आम सहमति बनी है कि अब ध्यान केवल भागीदारी बढ़ाने से हटकर निरंतर नेतृत्व और जवाबदेही पर होना चाहिए।

सेल्सफोर्स साउथ एशिया की सीईओ अरुंधति भट्टाचार्य ने कहा, ”वे (महिलाएं) नया नियम लिख रही हैं। वे न केवल मौजूदा ढांचे में सफल हो रही हैं, बल्कि मौलिक रूप से बदल रही हैं कि प्रौद्योगिकी नेतृत्व कैसा दिखना चाहिए।” उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी अधिक शिक्षित, विश्व स्तर पर जुड़ी हुई और पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वासी है।

एसएपी लैब्स इंडिया की प्रबंध निदेशक और नैसकॉम की चेयरपर्सन सिंधु गंगाधरन ने कहा कि युवा महिलाएं एआई, डेटा साइंस और इंजीनियरिंग में सक्रिय रूप से उत्पाद बना रही हैं और नवाचार का नेतृत्व कर रही हैं। उन्हें भरोसा है कि आने वाला दशक बिना किसी भेदभाव के महिलाओं के प्रतिनिधित्व के लिए परिवर्तनकारी होगा।

टेक महिंद्रा की सीआईओ पल्लवी कटियार ने कहा कि युवा महिलाओं का यह नजरिया कि नेतृत्व एक स्वाभाविक प्रगति है, बदलाव के लिए एक शक्तिशाली उत्प्रेरक साबित होगा।

महिलाओं के लिए प्रवेश स्तर पर मजबूत संख्या के बावजूद शीर्ष पदों तक की यात्रा अभी भी कई बाधाओं से भरी है। एपी मोलर-मेर्सक की वरिष्ठ उपाध्यक्ष रेशम साही ने कहा, ”भारत के प्रौद्योगिकी कार्यबल में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग एक-तिहाई है, कार्यकारी भूमिकाओं में यह घटकर केवल सात प्रतिशत और निदेशक स्तर पर लगभग 13 प्रतिशत रह जाता है।” अब चुनौती कार्यबल में प्रवेश की नहीं, बल्कि नेतृत्व तक निरंतर प्रगति की है।

विप्रो लिमिटेड की मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (सीटीओ) संध्या अरुण ने नेतृत्व में हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए अधिक जवाबदेही की वकालत की। उन्होंने कहा, ”जब नेतृत्व के रास्ते पारदर्शी होंगे और परिणामों को मापा जाएगा, तभी समावेशिता वास्तविक होगी।”

भाषा पाण्डेय रमण

रमण