मुंबई, 17 जनवरी (भाषा) निजी क्षेत्र के ऋणदाता यस बैंक का चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में शुद्ध लाभ 55 प्रतिशत की उछाल के साथ 952 करोड़ रुपये रहा। बैंक के मुनाफे में इस वृद्धि की मुख्य वजह प्रावधानों में आई भारी कमी रही।
बैंक ने शनिवार को अपने वित्तीय परिणामों की घोषणा करते हुए बताया कि पिछले साल की समान अवधि (दिसंबर तिमाही) में उसका शुद्ध लाभ 612 करोड़ रुपये था, जबकि चालू वित्त वर्ष की पिछली सितंबर तिमाही में यह आंकड़ा 654 करोड़ रुपये था।
बैंक की मुख्य शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) 10.9 प्रतिशत बढ़कर 2,466 करोड़ रुपये रही। यह वृद्धि शुद्ध ब्याज मार्जिन में 0.10 प्रतिशत के विस्तार और ऋण में 5.2 प्रतिशत की बढ़त के कारण हुई है।
हालांकि, नए श्रम कानून के कार्यान्वयन के कारण बैंक को ग्रेच्युटी के मद में 155 करोड़ रुपये का प्रावधान करना पड़ा।
यस बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) प्रशांत कुमार ने परिणामों पर चर्चा करते हुए कहा कि बैंक नए ऋण देने के मामले में ‘सतर्क’ है। यही कारण है कि बैंक की ऋण वृद्धि बैंकिंग प्रणाली के दहाई अंकों के औसत प्रदर्शन की तुलना में कम रही है।
उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट ऋण के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा है, जबकि आवास और वाहन ऋण का क्षेत्र फंड की उच्च लागत के कारण फिलहाल बहुत लाभदायक नहीं है।
कुमार ने बताया कि बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए आठ प्रतिशत ऋण वृद्धि का लक्ष्य रखा है और आलोच्य तिमाही के दौरान बैंक की गैर-ब्याज आय आठ प्रतिशत बढ़कर 1,633 करोड़ रुपये रही।
सीईओ ने कहा कि बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार हुआ है। सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (सकल एनपीए) 0.10 प्रतिशत सुधरकर 1.5 प्रतिशत पर आ गई हैं। बैंक का कुल प्रावधान पिछले साल के 259 करोड़ रुपये के मुकाबले घटकर महज 21.89 करोड़ रुपये रह गया, जिससे बैंक के मुनाफे को बल मिला।
प्रशांत कुमार ने बताया कि क्रेडिट कार्ड और व्यक्तिगत ऋण जैसे असुरक्षित ऋण खंड में चूक के मामले कम हो रहे हैं।
दिसंबर के अंत तक बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात 14.5 प्रतिशत रहा। कुमार के अनुसार, बैंक की वर्तमान में और पूंजी जुटाने की कोई योजना नहीं है।
भाषा सुमित पाण्डेय
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