Reported By: Rajesh Raj
,रायपुरः Congress Training Camp Inside Story: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे अभनपुर में चल रही कांग्रेस के सभी जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग अब खत्म हो गई है। 10 दिनों तक चले इस प्रशिक्षण शिविर में दिल्ली और छत्तीसगढ़ के बड़े-बड़े नेताओं ने विभिन्न विषयों को लेकर मार्गदर्शन दिया। प्रशिक्षण के दौरान जिला अध्यक्षों ने शीर्ष नेतृत्व के सामने संगठन से गुटबाजी और संगठन की उपेक्षा से जुड़े कई अहम मुद्दे उठाए। तो चलिए जानते हैं कि आखिर इस 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में आखिर क्या-क्या हुआ?
Congress Training Camp Inside Story: दरअसल, अभनपुर के मैरिज हॉल में संगठन को मजबूत करने के उद्देश्य से 10 दिनों तक कांग्रेस का संगठन सृजन प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। अंतिम दिन सोमवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने संबोधित किया। इसके साथ ही सभी जिला अध्यक्षों को प्रशिक्षण शिविर का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। दावा किया जा रहा है कि इस ट्रेनिंग के बाद कांग्रेस के तमाम जिला अध्यक्ष इतने ट्रेंड हो चुके हैं कि आगामी चुनाव में सत्ता पलट देंगे। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में अब कांग्रेस नया और आक्रामक दिखेगी। प्रशिक्षण शिविर में नए जिला अध्यक्षों को पूरी तरह से ट्रेंड कर दिया गया है। सर्व गुण संपन्न और पूरी तरह से निपुण करके भेजा जा रहा है।
10 दिवसीय ट्रेनिंग के दौरान दिल्ली से कई सीनियर लीडर भी पहुंचे और सभी ने जिलाध्यक्षों को संबोधित किया। प्रदेश के जिला अध्यक्षों का उनसे सवाल था कि हम संघर्ष तो कर लेंगे और सरकार भी बना देंगे, लेकिन उसके बाद उन्हें किनारे तो नहीं कर दिया जाएगा। उन्होंने मांग की कि सरकार बनने के बाद भी संगठन की अनदेखी न हो और जिला अध्यक्षों की निर्णय प्रक्रिया में प्रभावी भागीदारी बनी रहे। कांग्रेस जिला अध्यक्षों ने अपने अनुसार जिला की कार्यकारिणी गठित करने और काम करने की आजादी भी मांगी। कहा जा रहा है कि इन दोनों मांग पर उन्हें शीर्ष नेताओं से ठोस आश्वासन मिल गया है।
बताया जा रहा है कि ट्रेनिंग के दौरान नेताओं ने जिला अध्यक्षों को क्लियर मैसेज दिया गया कि ना कोई गुटबाजी करनी है और ना ही गुटबाजी में शामिल होना है। एक ऐप के जरिए सारे जिला अध्यक्ष सीधे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और महासचिव केसी वेणुगोपाल से जुड़े रहेंगे। हर छोटे बड़े काम और निर्णय की रिपोर्टिंग ऐप पर सीधें करेंगे। प्रदेश का कोई बड़ा नेता उनके अधिकार और निर्णय में अड़ंगा डालता है तो सीधे इसकी शिकायत उपर कर सकते हैं। यही आजादी नए जिला अध्यक्षों को नई ताकत दी गई है, क्योंकि आज भी कई जिला अध्यक्षों की खुद की जिला कार्यकारिणी उनके मन मुताबिक नहीं बन पाई है। कांग्रेस के सीनियर नेता पवन खेड़ा से लेकर पीसीसी अध्यक्ष भी नए जिला अध्यक्षों की मांग पर काम करने का आश्वासन दिया है।
प्रदेश कांग्रेस में लंबे समय से बड़े नेताओं के बीच गुटबाजी और सत्ता के दौरान संगठन की उपेक्षा को पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी माना जाता रहा है। दावा किया जाता है कि सरकार में रहते हुए संगठन और जमीनी कार्यकर्ताओं की अपेक्षित भागीदारी नहीं होने से कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा, जिसका असर चुनावी प्रदर्शन पर भी पड़ा। यही वजह है कि इस बार प्रशिक्षण शिविर में शीर्ष नेतृत्व ने जिला अध्यक्षों को गुटबाजी से दूर रहकर संगठन को मजबूत करने, सीधे केंद्रीय नेतृत्व से संवाद बनाए रखने और संगठन को अधिक अधिकार देने का भरोसा दिया है, ताकि भविष्य में सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित हो सके। कांग्रेस का संघर्ष और सत्ता में दोबारा वापसी की संभावना तब तक अधूरी है, जब तक कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व इन चुनौतियों से निपट ना लें।
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