Chhattisgarh Politics News/Image Credit: IBC24.in
Chhattisgarh Politics News: रायपुर: देश भर में आदिवासियों को कांग्रेस से जोड़े रखने के लिए दिल्ली में आदिवासी कांग्रेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक हुई। केंद्रीय नेतृत्व ने देशभर के आदिवासी नेताओं के साथ आदिवासियों को साथ लाने की रणनीति बनाई। बैठक में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ (Chhattisgarh Politics News) छत्तीसगढ़ से PCC चीफ दीपक बैज,आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विक्रांत भूरिया, सांसद और विधायक शामिल हुए। कांग्रेस नेताओं ने तय किया कि वो देशभर में आदिवासी अधिकारों के हनन, जल-जंगल-जमीन से बेदखली, PESA कानून जैसे मुद्दों पर आदिवासियों को एकजुट कर आंदोलन करेंगे।
इधर, बीजेपी ने कांग्रेस की इस कवायद को खारिज करते हुए। केवल अपना वजूद बचाने की कोशिश बताया कहा कि देश-प्रदेश का आदिवासी कांग्रेस की असलियत पहचान कर उसका साथ कब का छोड़ चुका है। पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने तंज कसते हुए कहा कि, कांग्रेस के 3-4 गुट हैं जिसमें से (Chhattisgarh Politics News) एक काबिक गुट को ही दिल्ली बुलाया गया।
वैसे विपक्ष की आदिवासियों को लेकर चिंता बेमानी नहीं है। छत्तीसगढ में बस्तर में 11, जबकि सरगुजा में 09 सीटें सीधे-सीधे ST वर्ग की हैं। 2018 में इन दोनों आदिवासी अंचल में कांग्रेस को बंपर सीटें मिलीं। जबकि 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरगुजा में पूरी तरह साफ हो गई और बस्तर में भी (Chhattisgarh Politics News) निराशाजनक प्रदर्शन रहा। उस पर से नक्सलवाद के सफाए का श्रेय कहीं उसे फिर इन क्षेत्रों में बड़ा झटका ना दे। इसे देख कांग्रेस अभी से एक्टिव होना चाहती है। सवाल है क्या कांग्रेस वाकई वर्ग की असर समस्याओं पर फोकस कर पाएगी ? उससे भी बड़ा सवाल ये कि क्या आदिवासी कांग्रेस के साथ जुड़ पाएंगे ?
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