रायपुर की सड़क पर कब ब्रेक लगाना है और कब बढ़ानी है स्पीड, तय करतीं हैं गौमाता, यकीन न हो तो देखिए ये रिपोर्ट

रायपुर की सड़क पर कब ब्रेक लगाना है और कब बढ़ानी है स्पीड! Animals rule the streets of the capital city of Raipur! Animals on the road ... the public stricken

Modified Date: November 29, 2022 / 08:04 pm IST
Published Date: August 30, 2021 11:03 pm IST

रायपुर: मवेशियों का सड़क पर घूमना राजधानी में सड़क हादसे की बड़ी वजह है। इन्हें सड़क पर आने से रोकने के लिए रोका-छेका अभियान जोर-शोर से चल रहा है। लेकिन मवेशियों और उनके पालकों ने इस अभियान के विरोध में जैसे अपना अभियान छेड़ दिया है। सुबह से रात तक ये अलग अलग सड़कों पर घूमते रहती हैं।

Read More: बिजली कटौती…घर में असंतोष! कई इलाकों में हो रही अघोषित बिजली कटौती से हलाकान हुए लोग

सुबह हो या शाम, दिन हो या रात राजधानी रायपुर के सभी चौक चौराहों पर ऐसा लगता है कि ट्रैफिक की पूरी जिम्मेदारी गौ माता को दे दी गई हो। कब किस सड़क पर ब्रेक लगाना है और कब एक्सलरेटर दबाना है। ये ड्राइवर नहीं, बल्कि सड़क पर मार्च कर रही गायें तय करती हैं। यहां ट्रैफिक इंस्पेक्टर से लेकर आरटीओ तक सारी व्यवस्था इनके हवाले है। जब जहां मर्जी सड़क पर आ गईं। संभल गए तो भगवान का शुक्र मनाइए। लेकिन जरा सा भी चूके तो यहां चालान के रूप में आपकी जान जा सकती है। इन्हीं सड़कों पर दो दिन के भीतर दो लोगों की जान ऐसे पशुओं की वजह से जा चुकी है। ट्रैफिक डिपार्टमेंट भी मानता है कि सड़क दुर्घटना की सबसे बड़ी वजह ये मवेशी बन चुके हैं।

Read More: पावर कट का करंट…बेहाल उद्योग! छत्तीसगढ़ में एक बार फिर गहराता दिख रहा है बिजली संकट

यातायात विभाग सड़कों को इनके कब्जे से आजाद नहीं करा सकता। नगर निगम इसे कोई बड़ी समस्या मानता नहीं। जबकि मवेशी मालिक तो सड़कों को भी चारागाह का ही दर्जा दे चुके हैं। सरकार ने रोका छेका अभियान शुरू किया तो लगा कि इनको सड़क पर आने से रोका जाएगा। लेकिन नजर आ रहा है इसके उल्टा। मवेशी ही लोगों को सड़क पर आने से रोकते नजर आ रहे हैं। सरकार कह रही है कि वो इसपर लगाम लगाने के लिए अधिकारियों को निर्देश देगी।

Read More: 7 सितंबर सुबह 6 बजे तक लगाया गया लॉकडाउन, शादी-अंतिम संस्कार में शामिल हो सकेंगे सिर्फ 50 लोग, यहां जारी हुआ आदेश

सरकार और निगम तो बस इसका हिसाब लगा रहे हैं कि आपने समय पर रोड टैक्स और दूसरे टैक्स दिया या नहीं। मवेशी मालिक और निजी डेयरी वाले बस दूध और गोबर का हिसाब लगा रहे हैं। बाकी स्मार्ट सिटी की सड़क दुर्घटनाओं का पूरा हिसाब किताब इन स्मार्ट पशुओं के हवाले है। बच गए तो भगवान का शुक्र मनाइए।

Read More: परिवहन विभाग में बंपर तबादले, जारी आदेश में परिवहन निरीक्षक, उप निरीक्षक का नाम शामिल, देखिए पूरी सूची


लेखक के बारे में

"दीपक दिल्लीवार, एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 10 साल का एक्सपीरिएंस है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक ऑनलाइन समाचार वेबसाइट से की थी, जहां उन्होंने राजनीति, खेल, ऑटो, मनोरंजन टेक और बिजनेस समेत कई सेक्शन में काम किया। इन्हें राजनीति, खेल, मनोरंजगन, टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल और बिजनेस से जुड़ी काफी न्यूज लिखना, पढ़ना काफी पसंद है। इन्होंने इन सभी सेक्शन को बड़े पैमाने पर कवर किया है और पाठकों लिए बेहद शानदार रिपोर्ट पेश की है। दीपक दिल्लीवार, पिछले 5 साल से IBC24 न्यूज पोर्टल पर लीडर के तौर पर काम कर रहे हैं। इन्हें अपनी डेडिकेशन और अलर्टनेस के लिए जाना जाता है। इसी की वजह से वो पाठकों के लिए विश्वसनीय जानकारी के सोर्स बने हुए हैं। वो, निष्पक्ष, एनालिसिस बेस्ड और मजेदार समीक्षा देते हैं, जिससे इनकी फॉलोवर की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। काम के इतर बात करें, तो दीपक दिल्लीवार को खाली वक्त में फिल्में, क्रिकेट खेलने और किताब पढ़ने में मजा आता है। वो हेल्दी वर्क लाइफ बैलेंस करने में यकीन रखते हैं।"