Bastar Unsurveyed Villages. Image Source- IBC24 Archive
अशफाक अहमद/राजेश राज, नारायणपुर/रायपुरः Bastar Unsurveyed Villages: छत्तीसगढ़ के बस्तर में आजादी के करीब 80 साल बाद एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। 497 गांव ऐसे हैं, जिनका आज तक कोई सरकारी रिकॉर्ड ही नहीं था। नक्सलवाद की वजह से यहां न जमीन का हिसाब, न आबादी का डेटा था। नक्सलवाद के खात्मे के साथ अब हालात बदल रहे हैं। इन गांवों में पहली बार राजस्व सर्वे शुरू किया जा रहा है।
Bastar Unsurveyed Villages: दरअसल, बस्तर में सालों तक नक्सलियों का दबदबा रहा। इसी डर की वजह से प्रशासन इन इलाकों तक पहुंच ही नहीं पाया। नतीजा ये रहा कि सैकड़ों गांव सरकारी रिकॉर्ड से बाहर ही रह गए। सरकार को सिर्फ इनके नाम पता थे, लेकिन गांव कितने बड़े हैं, कितने लोग रहते हैं, किसके पास कितनी जमीन है? इसका कोई रिकॉर्ड नहीं था। बस्तर के अनसर्वे गांवों की बात करें तो नारायणपुर के 240, बीजापुर के 91, सुकमा के 97, कोंडागांव के 52, बस्तर के 25, कांकेर के 10, दंतेवाड़ा के 10 गांव शामिल हैं।
नारायणपुर के अबूझमाड़ में पहुंचना आज भी आसान नहीं है। कई गांव ऐसे हैं जहां नदी, जंगल और पहाड़ पार करके जाना पड़ता है और यही वजह थी कि यहां आज तक सर्वे का काम नहीं हो पाया, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। इन गांवों में पहली बार आईआईटी रुड़की की मदद से राजस्व सर्वे शुरू किया जा रहा है। जमीन, जंगल, नदी और खेत सबका रिकॉर्ड तैयार होगा। इस सर्वे के बाद गांव के लोगों को अपनी जमीन पर कानूनी हक, फसल बेचने का अधिकार, सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा। इस मामले को लेकर कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि यह किसी बड़े के सपने के साकार होने जैसा है। बस्तर के विकास को लेकर हमारी सरकार लगातार काम कर रही है।