Bijapur Naxali Surrender: लाल आतंक से नक्सलियों का मोहभंग, 20 से ज्यादा नक्सली फिर छोड़ेंगे हथियार, डेडलाइन से पहले मुख्यधारा में लौटेंगे

Bijapur Naxali Surrender: सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 20 से अधिक नक्सली आज आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं।

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  • Publish Date - January 15, 2026 / 01:15 PM IST,
    Updated On - January 15, 2026 / 01:19 PM IST

naxali surrender news/ image source: IBC24

HIGHLIGHTS
  • 20 से अधिक नक्सली करेंगे सरेंडर
  • हथियार CRPF और पुलिस को सौंपे जाएंगे
  • एसपी और अधिकारी देखेंगे प्रक्रिया

बीजापुर: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बीजापुर जिले से आज एक बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 20 से अधिक नक्सली आज आत्मसमर्पण करने जा रहे हैं। Bijapur Naxali Surrender कार्यक्रम आज शाम 4 बजे पुलिस ऑफिसर्स मेस के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित किया जाएगा, जहां वे एसपी और सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हथियार डालेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली अलग-अलग संगठनों से जुड़े रहे हैं और लंबे समय से जंगलों में सक्रिय थे। इन पर कई गंभीर वारदातों में शामिल होने का आरोप भी रहा है। हालांकि, अब ये नक्सली हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला कर चुके हैं।

Naxali Surrender News: सुरक्षा बलों की रणनीति लाई रंग

Bijapur Naxali Surrender के मामले को देखें तो, बीते कुछ वर्षों में बीजापुर और आसपास के इलाकों में पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने नक्सल विरोधी अभियानों को तेज किया है। लगातार सर्च ऑपरेशन, कैंपों की स्थापना और इलाके में सुरक्षा की मजबूत मौजूदगी के चलते नक्सलियों पर दबाव बढ़ा है। इसके साथ ही राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति ने भी नक्सलियों को हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरित किया है।

अधिकारियों का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की ओर से तय नियमों के तहत पुनर्वास पैकेज, आर्थिक सहायता, आवास, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं प्रदान की जाएंगी, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।

Bijapur Naxali Surrender: सरेंडर से नक्सल नेटवर्क को झटका

Bijapur Naxali Surrender नक्सली संगठनों के मनोबल के लिए बड़ा झटका है। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि क्षेत्र में सुरक्षा बलों की रणनीति प्रभावी साबित हो रही है और विकास की राह पर भरोसा बढ़ रहा है। यह भी कहा जा रहा है कि नक्सली अ सुरक्षाबलों की डेडलाइन से भी डर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आत्मसमर्पण कार्यक्रम के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं और पूरे परिसर की निगरानी की जा रही है।

Bijapur News: पहले भी हो चुके हैं बड़े सरेंडर

गौरतलब है कि Bijapur Naxali Surrender से पहले भी बीजापुर और आसपास के जिलों में दर्जनों नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं। कई पूर्व नक्सली अब सामान्य जीवन जी रहे हैं और कुछ को सरकारी योजनाओं के तहत रोजगार भी मिला है। इससे अन्य नक्सलियों को भी हिंसा छोड़ने के लिए प्रेरणा मिल रही है।

बस्तर में हालात एक महीने पहले तेजी से बदलते नजर आए । कभी नक्सली गतिविधियों के लिए कुख्यात रहे इलाकों में लगातार नक्सलियों के आत्मसमर्पण से हालात में बड़ा बदलाव देखा गया। पिछले महीने तक नक्सलियों द्वारा हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का सिलसिला लगातार जारी था और कई नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके थे।

इसी क्रम में एक महीने पहले बीजापुर में बड़ी संख्या में नक्सलियों ने एक साथ आत्मसमर्पण किया था। Bijapur Naxal Surrender से जुड़ी जानकारी के अनुसार, उस दौरान कुल 34 नक्सलियों ने पुलिस और CRPF अधिकारियों के सामने हथियार डालकर आत्मसमर्पण किया था। इन सभी नक्सलियों ने हिंसा छोड़कर विकास और शांति की राह अपनाने का संकल्प लिया था।

जानकारी के मुताबिक, आत्मसमर्पण करने वालों में कई इनामी नक्सली भी शामिल थे, जिन पर पुलिस ने लंबे समय से इनाम घोषित कर रखा था। बताया गया था कि इन नक्सलियों पर कुल 84 लाख रुपये का इनाम घोषित था, जो सुरक्षा बलों के लिए बड़ी सफलता मानी गई थी। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली कई वर्षों से जंगलों में सक्रिय थे और अलग-अलग घटनाओं में शामिल रहे थे। सरेंडर करने वाले समूह में 7 महिला और 27 पुरुष नक्सली शामिल थे। आत्मसमर्पण के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और वरिष्ठ पुलिस व सीआरपीएफ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरा कार्यक्रम संपन्न हुआ था। उस समय अधिकारियों ने बताया था कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत जरूरी सहायता, आर्थिक लाभ और मुख्यधारा में लौटने के लिए सहयोग दिया जाएगा। प्रशासन ने इसे बस्तर क्षेत्र में शांति स्थापना की दिशा में एक अहम कदम बताया था।

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