Home » Chhattisgarh » Chhattisgarh Naxalites Surrender in Bijapur, 19 Maoists left the path of violence and separatism
Chhattisgarh Naxalites Surrender: पूरा हो रहा मोदी-साय का मिशन बस्तर!.. अब 19 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, इतना था लाल लड़ाकों पर इनाम
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पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार की नीतियां और सुरक्षा बलों की कार्रवाई कारगर साबित हो रही हैं। बस्तर अब तेजी से नक्सल मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
Chhattisgarh Naxalites Surrender in Bijapur: बीजापुर: बस्तर में शांति बहाल करने और नक्सलवाद को खत्म करने के प्रयास लगातार जारी हैं। केंद्र और राज्य सरकार मिलकर नक्सल मुक्त बस्तर की दिशा में तेजी से काम कर रही हैं। इस अभियान के तहत प्रतिबंधित माओवादी संगठन को लगातार भारी नुकसान हो रहा है।
सरकार और सुरक्षा बलों की रणनीति के तहत एक बार फिर बड़ी सफलता मिली है। बीजापुर जिले में 19 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और अन्य सुरक्षाबलों के सामने अपने हथियार डाल दिए।
Chhattisgarh Naxalites Surrender in Bijapur: आत्मसमर्पित नक्सलियों में से 10 पर कुल 29 लाख रुपये का इनाम घोषित था। ये सभी बीजापुर समेत कई इलाकों में सक्रिय थे और लंबे समय से सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बने हुए थे।
पिछले कुछ महीनों में बड़ी संख्या में नक्सली मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इससे यह साफ संकेत मिलता है कि सरकार की नीतियां और सुरक्षा बलों की कार्रवाई कारगर साबित हो रही हैं। बस्तर अब तेजी से नक्सल मुक्त होने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
सरकार नक्सलवाद समाप्त करने के लिए क्या कदम उठा रही है?
सरकार ने 'निया नेल्लनार' (आपका अच्छा गाँव) योजना के तहत अंदरूनी इलाकों में बुनियादी सुविधाएँ उपलब्ध कराने और विकास कार्य करने का प्रयास किया है। साथ ही, सुरक्षा बलों की निरंतर कार्रवाई और आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से नक्सलियों को मुख्यधारा में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को क्या लाभ मिलते हैं?
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता राशि प्रदान की जाती है और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाता है।
आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सरकार की पुनर्वास नीति के तहत सहायता राशि प्रदान की जाती है और उन्हें मुख्यधारा में शामिल करने के लिए विभिन्न योजनाओं का लाभ दिया जाता है।
पिछले कुछ वर्षों में बड़ी संख्या में नक्सलियों के आत्मसमर्पण और सुरक्षा बलों की सफल कार्रवाइयों के कारण बस्तर क्षेत्र में नक्सलवाद का प्रभाव कम हो रहा है, जिससे यह क्षेत्र नक्सल मुक्त होने की दिशा में अग्रसर है।