Reported By: Devendra Mishra
,Bilai Mata Temple Dhamtari: शक्ति आराधना का पावन पर्व नवरात्र शुरू हो गया है। भक्ति और आस्था के देवी मंदिरों में शक्ति की पूजा की जा रही है। छत्तीसगढ़ के धमतरी में एक माता का ऐसा दरबार है, जहां सिर्फ पूजा नहीं बल्कि चमत्कार भी देखे जाते हैं। यहां सदियों से जल रही है आस्था की ज्योति नवरात्र के पावन दिनों और अधिक प्रगाढ़ दिखती है। धमतरी के रामबाग में स्थित मां बिलई का मंदिर जितना रहस्यमयी है, उतना ही ऐतिहासिक और अनोखा भी है। तो चलिए जानते हैं कि आखिर बिलई माता का महिमा क्या है?
धमतरी शहर के रामबाग में इलाके में स्थित बिलई माता का दिव्यदरबार जिसे पूरे इलाके में मां विध्यवासिनी माता के नाम से भी जाना जाता है। चैत्र नवरात्र के इस पावन अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। हर कोई माता के चरणों में अपनी आस्था अर्पित करने पहुंच रहे हैं। सदियों पुराना यह शक्तिपीठ आज भी अपनी चमत्कारी शक्तियों के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि करीब 500 साल पहले मां विध्यवासिनी स्वयं पाषाण रूप में यहां प्रकट हुई थीं। इतिहास के पन्नों में दर्ज है कि कांकेर के राजा नरहरदेव जब शिकार के लिए निकले तो घने जंगलों में उन्हें माता के दिव्य दर्शन हुए। स्वप्न में मिले संकेत के बाद यहां माता की स्थापना की गई। तब से लेकर आज तक इस दरबार में आस्था की लौ कभी नहीं बुझी।
यह भी मान्यता है कि गंगरेल में स्थित मां अंगारमोती और मां दंतेश्वरी की बड़ी बहन मां विंध्यवासिनी हैं। बिलई माता नाम के पीछे भी एक अनोखी कहानी है। कहा जाता है कि जब माता पहली बार प्रकट हुईं तो उनके पाषाण स्वरूप के दोनों ओर दो काली बिल्लियां बैठी थीं और मंदिर निर्माण के बाद वो रहस्यमयी तरीके से गायब हो गईं। तभी से मां विंध्यवासिनी को बिलई माता के नाम से पुकारा जाने लगा।
यहां आने वाला हर भक्त अपने दुख-दर्द लेकर आता है और विश्वास के साथ लौटता है। लोग मानते हैं मां के दरबार में सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद जरूर पूरी होती है। इसी विश्वास ने इस मंदिर को आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बना दिया है। इस चैत्र नवरात्र में करीब दो हजार से ज्यादा ज्योत प्रज्वलित की जा रही है। देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु यहां अपनी आस्था की लौ जलाने पहुंचते हैं। हर दीपक, एक विश्वास और हर ज्योति एक उम्मीद बनकर जलती है। मां की कृपा सिर्फ एक धर्म या वर्ग तक सीमित नहीं बल्कि हर जाति, हर समाज, हर वर्ग पर समान रूप से बनी हुई है। यही वजह है कि धमतरी को धर्म और आस्था की नगरी कहा जाता है। कहते हैं कि इस मंदिर की घंटियों की गूंज से ही धमतरी शहर की सुबह होती है। मां को यहां शहर की इष्ट देवी माना जाता है और हर शुभ कार्य से पहले लोग यहां माथा टेकना नहीं भूलते।
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