Bilaspur High Court Latest Order: ‘दो शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश’.. बिलासपुर हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सिंगल बेंच के पुराने फैसले को किया रद्द

Ads

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने शादीशुदा बेटियों को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित करने का बैंक का फैसला रद्द कर 90 दिन में नियुक्ति देने का आदेश दिया।

Bilaspur High Court on Compassionate Appointment | Image- IBC24 NEWS File

HIGHLIGHTS
  • शादीशुदा बेटी को नौकरी से नहीं कर सकते
  • वंचित हाईकोर्ट ने बैंक का आदेश किया रद्द
  • 90 दिन में नियुक्ति देने का निर्देश

बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने अनुकंपा नियुक्ति को लेकर अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सिर्फ शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता। (Bilaspur High Court on Compassionate Appointment) हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दो शादीशुदा बेटियों को बैंक में अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया है।

IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे WhatsApp ग्रुप से जुड़े

’90 दिनों के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी हो’ : छग HC

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के पुराने फैसले को रद्द करते हुए बैंक को निर्देश दिया कि दोनों महिलाओं की शैक्षणिक योग्यता और लागू नियमों के अनुसार 90 दिनों के भीतर नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी की जाए।

विवाहित कहकर ख़ारिज किया आवेदन

मामला छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के दो कर्मचारियों से जुड़ा है। कर्मचारी मदन कुमार पांडा और शैलेन्द्र कुमार जॉन्सन की सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उनकी शादीशुदा बेटियों अंकिता मिश्रा और शीना डेविड ने अनुकंपा नियुक्ति के लिए आवेदन किया था। (Bilaspur High Court on Compassionate Appointment) बैंक ने दोनों के आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिए कि वे विवाहित हैं। बैंक के फैसले के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया था। हालांकि, सिंगल बेंच ने 7 मई 2026 को उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इसके बाद दोनों ने डिवीजन बेंच में रिट अपील दायर की। डिवीजन बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि बैंक ने केवल बेटियों के विवाहित होने को आधार बनाकर उन्हें नियुक्ति से वंचित किया, जबकि इसी योजना में विवाहित बेटों को लाभ दिया जा रहा था। कोर्ट ने इसे समानता के अधिकार के खिलाफ माना।

IBC24 News के लेटेस्ट Updates और ताजा समाचार के लिए हमारे Instagram Page को Follow करें

सिंगल बेंच के फैसले को भी किया रद्द

कोर्ट ने यह भी कहा कि शादी हो जाने मात्र से यह नहीं माना जा सकता कि बेटी की अपने माता-पिता पर आर्थिक या सामाजिक निर्भरता खत्म हो गई है। ऐसे मामलों में वास्तविक स्थिति और परिवार की निर्भरता का आकलन किया जाना जरूरी है। (Bilaspur High Court on Compassionate Appointment) हाईकोर्ट ने बैंक के दोनों रिजेक्शन आदेशों के साथ सिंगल बेंच के फैसले को भी रद्द कर दिया और दोनों अपीलकर्ताओं को नियमानुसार अनुकंपा नियुक्ति देने का आदेश दिया।

इन्हें भी पढ़ें:

बिहार: छात्रों के पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल, पुलिस ने किया लाठीचार्ज

उप्र: ईडी ने जीएसटी ‘धोखाधड़ी’ मामले में छापेमारी के बाद तीन करोड़ रुपये से अधिक जब्त किए

टाटा स्टील को झारखंड सरकार के 1,755 करोड़ रुपये के मांग नोटिस पर अंतरिम राहत

महाराष्ट्र के लातूर में सी-सेक्शन प्रसव के बाद महिला की मौत, चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज

अनुकूल को पांच विकेट, पूर्वोत्तर क्षेत्र को पारी और 210 रन से हराकर पूर्व क्षेत्र सेमीफाइनल में

Q1. हाईकोर्ट ने शादीशुदा बेटी पर क्या फैसला दिया?

केवल शादीशुदा होने के आधार पर बेटी को अनुकंपा नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

Q2. हाईकोर्ट ने बैंक को क्या निर्देश दिया?

बैंक को नियम और योग्यता के अनुसार दोनों बेटियों को 90 दिन में नियुक्ति देने कहा गया।

Q3. बेटियों की नियुक्ति क्यों रोकी गई थी?

बैंक ने उनके विवाहित होने को अनुकंपा नियुक्ति के लिए अयोग्यता का आधार बनाया था।