वादों का हिसाब.. विपक्ष मांगे जवाब, अधूरे वायदों का हिसाब किसके लिए बनेगी बड़ी चुनौती?

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Both the parties are gearing up for 2023 In Chhattisgarh

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  • Publish Date - September 16, 2022 / 11:56 PM IST,
    Updated On - November 29, 2022 / 08:36 PM IST

(रिपोर्टः राजेश मिश्रा) रायपुरः Both the parties are gearing छत्तीसगढ़ में दोनों दल 2023 को लेकर कमर कस चुके हैं। संगठन में कसावट के साथ-साथ अब दोनों पार्टियों का फोकस पिछले चुनाव के अधूरे वायदों पर है। भाजपा,कांग्रेस को उनके घोषणा पत्र के 36 वायदों में से अधूरे वायदे याद दिला रही है। तो कांग्रेस की बीजेपी को नसीहत है कि कुछ सवाल केंद्र में बैठी मोदी सरकार से भी पूछे। क्योंकि अच्छे दिनों का, महंगाई हटाने का, लाखों को नौकरियों का भाजपा का चुनावी वायदा अब भी अधूरा है। बड़ी बात ये कि भाजपा चुनावों से पहले इन अधूरे वायदों को हर बूथ पर ले जाने की तैयारी कर रही है। सवाल ये कि अधूरे वायदों का हिसाब किसके लिए बड़ी चुनौती बनेगा? किसे भारी पड़ेगा?

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Both the parties are gearing राज्य में चुनावी तैयारी में जुटे बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही एक दूसरे के अधूरे वायदे याद दिला रहे हैं। भाजपा नेताओं का आरोप है कि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के दौरान जनता से 36 वादे किए थे जिसमें से ज्यादातर अधूरे हैं। भाजपा सत्तापक्ष को शराबबंदी ,बेरोजगारी भत्ता और माफिया राज खत्म करने का वायदा अधूरा बताकर घेरती रही है। बीजेपी अब इन्हीं अधूरी घोषणाओं को लेकर बूथ स्तर तक सवाल उठाने जा रही है। पूर्व सीएम रमन सिंह ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को नसीहत देते हुए कहा कि वो शांति से बैठकर इन घोषणाओँ के क्रियान्वयन की चिंता करें। भाजपा का सीधा आरोप है कि केंद्र तो विभिन्न योजना के तहत पैसा दे रहा है लेकिन राज्य सरकार उसका दुरुपयोग कर रही है ।

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विपक्ष के आरोपों पर सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए नसीहत दी कि भाजपा नेताओं को मोदी जी से उनके घोषणा पत्र के अधूरे वायदों के बारें सवाल पूछने का साहस भी करना चाहिए। जिन्होंने दो करोड़ युवाओं को रोजगार देने का वादा किया था, महंगाई कम कर अच्छे दिन लाने का वादा किया था, उनका क्या हुआ?

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ये तो साफ है कि अधूरे वायदों को लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों को पास सवाल भी हैं और विरोधी के लिए नसीहतें भी, लेकिन बड़ा सवाल ये कि छत्तीसगढ़ की जनता को किनके वायदों पर ज्यादा भरोसा है, उनके मुताबिक किसका हिसाब ठीक है और किसका खराब।