CG Liquor and DMF Scam: आबकारी और DMF घोटाले को लेकर बड़ा अपडेट, अनवर ढेबर सहित इन आरोपियों को मिली जमानत

आबकारी और DMF घोटाले को लेकर बड़ा अपडेट, अनवर ढेबर सहित इन आरोपियों को मिली जमानत, CG Liquor and DMF Scam Latest Update

CG Liquor and DMF Scam: आबकारी और DMF घोटाले को लेकर बड़ा अपडेट, अनवर ढेबर सहित इन आरोपियों को मिली जमानत
Modified Date: March 3, 2026 / 06:22 pm IST
Published Date: March 3, 2026 6:22 pm IST

बिलासपुर। CG Liquor and DMF Scam: छत्तीसगढ़ के चर्चित आबकारी और DMF घोटाला मामले में बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व आईएएस अनिल टुटेजा और अनवर ढेबर को जमानत दे दी है। इसके साथ ही यश पुरोहित और नितेश पुरोहित को भी न्यायालय से राहत मिली है। यह आदेश जस्टिस अरविंद वर्मा की कोर्ट ने सुनाया। अदालत ने पूर्व में सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब जारी कर दिया गया है।

3200 करोड़ का हुआ था शराब घोटाला

CG Liquor and DMF Scam: छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED की जांच में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात सामने आई थी। जिसके बाद ED ने ACB में FIR दर्ज कराई थी। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज हुई थी। ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था। एजेंसी का दावा था कि चैतन्य बघेल इस सिंडिकेट के प्रमुख थे और करीब 1000 करोड़ रुपए की राशि संभाली।

DMF घोटाला क्या है?

प्रवर्तन निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने धारा 120 बी 420 के तहत केस दर्ज किया है। केस में यह तथ्य निकल कर सामने आए हैं कि डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड कोरबा के फंड से अलग-अलग टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता पाई गई। टेंडर भरने वालों को अवैध लाभ पहुंचाया गया। ED की जांच ने DMF घोटाले के तौर-तरीकों का खुलासा किया है। इसमें यह बात सामने आई है कि ठेकेदारों के बैंक खाते में जमा की गई राशि का बड़ा हिस्सा ठेकेदारों ने सीधे कैश में निकाल लिया है। जांच के दौरान ED ने ठेकेदारों, सरकारी और उनके सहयोगियों के अगल-अगल ठिकानों पर रेड मारी थी। कोरबा में हुए 575 करोड़ रुपए से ज्यादा के डिस्ट्रिक मिनरल फंड (DMF) घोटाला मामले में महत्वपूर्ण खुलासे हुए हैं। घूस लेने के लिए खर्च के नियम बदले गए। कलेक्टर को 40%, सीईओ 5%, एसडीओ 3% और सब इंजीनियर को 2% कमीशन मिला।

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