Non-veg Ban in KGMU Hostel: हॉस्टल में अब नहीं मिलेगा नॉनवेज, राज्यपाल की आपत्ति प्रशासन का बड़ा फैसला, जानें बाहर से मंगाने पर क्या है नियम
Non-veg Ban in KGMU Hostel: हॉस्टल में अब नहीं मिलेगा नॉनवेज, राज्यपाल की आपत्ति प्रशासन का बड़ा फैसला, जानें बाहर से मंगाने पर क्या है नियम
Non-veg Ban in KGMU Hostel | Photo Credit: AI
- छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पर रोक
- पकाने पर सख्त निगरानी
- प्रशासन का बड़ा फैसला
लखनऊ: Non-veg Ban in KGMU Hostel उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) ने (KGMU Hostel Non-veg Ban) अपने सभी छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पकाने पर रोक लगा दी है। हालांकि, छात्र बाहर से मांसाहारी भोजन मंगा सकेंगे। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। यह कदम उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल द्वारा छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पकाए जाने पर जताई गई चिंता के बाद उठाया गया है।
Non-veg Ban in KGMU Hostel राज्यपाल सोमवार को केजीएमयू के दीक्षांत समारोह में शामिल होने पहुंची थीं। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा था कि उन्हें जानकारी मिली है कि परिसर के तीन छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पकाया जा रहा है। केजीएमयू के अधिकारियों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि विश्वविद्यालय के किसी भी छात्रावास के भोजनालय में मांसाहारी भोजन शामिल नहीं है। हालांकि, अब परिसर और छात्रावासों में छात्रों द्वारा निजी स्तर पर मांसाहारी भोजन पकाने की भी निगरानी की जाएगी और उस पर रोक लगाई जाएगी।
नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर एक अधिकारी ने कहा, ‘‘केजीएमयू के किसी भी आधिकारिक भोजनालय में मांसाहारी भोजन नहीं बनाया जाता। भोजनालय के लिए निविदाएं जारी की जाती हैं और भोजन की सूची पहले से तय होती है, जिसमें मांसाहारी भोजन शामिल नहीं है।’ केजीएमयू के एक अन्य अधिकारी ने यह भी कहा कि आधिकारिक छात्रावास के भोजनालय की भोजन सूची में अंडा भी शामिल नहीं है। हालांकि, परिसर के सभी लोग इस दृष्टिकोण से सहमत नहीं हैं।
नाम न उजागर करने की शर्त पर एक वरिष्ठ संकाय सदस्य ने कहा, ‘‘क्या हम एक चिकित्सा विश्वविद्यालय नहीं हैं? क्या अब चिकित्सकों को उन मरीजों को अंडा खाने की सलाह देना भी बंद कर देना चाहिए, जिन्हें इसे खाने में कोई चिकित्सीय समस्या नहीं है? क्या हम देशभर से आए छात्रों की खान-पान संबंधी पसंद की अनदेखी कर उन पर अनावश्यक प्रतिबंध नहीं लगा रहे?’’ केजीएमयू के प्रवक्ता डॉ. कुमार शांतनु ने बताया कि कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने राज्यपाल द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा के लिए प्रतिकुलपति की अध्यक्षता में एक कार्यबल गठित किया है।
उन्होंने कहा, ‘‘केजीएमयू प्रशासन द्वारा संचालित 18 भोजनालय में न तो मांसाहारी भोजन पकाया जाता है और न ही परोसा जाता है। कुछ निजी भोजनालय हैं, जिन्हें छात्र सहकारी व्यवस्था के तहत संचालित करते हैं। वहां मांसाहारी भोजन बनाया जाता था, लेकिन राज्यपाल की टिप्पणी के बाद उन्हें भी ऐसा नहीं करने की सख्त सलाह दी गई है।’’ हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए बाहर से मांसाहारी भोजन मंगाने पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है।
इससे पहले 15 जून को राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के तीसरे दीक्षांत समारोह के दौरान भी राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्रावास के भोजनालय में सप्ताह में दो दिन मांसाहारी भोजन परोसे जाने की आवश्यकता पर सवाल उठाए थे। इस संबंध में आरएमएलआईएमएस के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल छात्रावास की भोजन सूची में सप्ताह में दो बार मांसाहारी भोजन शामिल है। उनका कहना है कि यह निर्णय मुख्य रूप से छात्रों की समितियों ने लिया था।
एक अधिकारी ने कहा, ‘इन समितियों में कुछ संकाय सदस्य भी शामिल होते हैं, लेकिन उनका संचालन मुख्य रूप से छात्र ही करते हैं। भोजनालय की भोजन सूची तय करने में संस्थान की कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं होती।’ हालांकि, संस्थान के अधिकारियों ने संकेत दिया कि लगभग 800 स्नातक और स्नातकोत्तर विद्यार्थियों वाले आरएमएलआईएमएस में इस विषय पर जल्द ही नए सिरे से विचार किया जाएगा। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘राज्यपाल महोदया ने यह मुद्दा उठाया है, इसलिए इस पर प्राथमिकता के आधार पर चर्चा की जाएगी।’’
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