Chhattisgarh Gaudham Yojana: छत्तीसगढ़ में मवेशियों के संरक्षण के लिए बड़ी पहल, प्रदेश में बनेंगे 1400 से ज्यादा गौधाम, बेसहारा मवेशियों को मिलेगा नया ठिकाना

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Chhattisgarh Gaudham Yojana: छत्तीसगढ़ में मवेशियों के संरक्षण के लिए बड़ी पहल, प्रदेश में बनेंगे 1400 से ज्यादा गौधाम, बेसहारा मवेशियों को मिलेगा नया ठिकाना

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  • Publish Date - August 6, 2026 / 07:13 AM IST,
    Updated On - August 6, 2026 / 07:14 AM IST

Chhattisgarh Gaudham Yojana: छत्तीसगढ़ में मवेशियों के संरक्षण के लिए बड़ी पहल, प्रदेश में बनेंगे 1400 से ज्यादा गौधाम, बेसहारा मवेशियों को मिलेगा नया ठिकाना /image: CGDPR

HIGHLIGHTS
  • प्रदेशभर में 1460 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य तय
  • अब तक 151 गौधामों को प्रशासकीय स्वीकृति, 42 में 5109 पशुओं का संरक्षण
  • ग्राम पंचायतों को संचालन में प्राथमिकता, हाईवे किनारे गौधामों का होगा विकास

रायपुर। Chhattisgarh Gaudham Yojana: राज्य में घुमंतू और बेसहारा पशुओं को सुरक्षित आश्रय देने, गौ-संरक्षण को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा ‘गौधाम योजना’ को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। योजना के अंतर्गत पूरे प्रदेश में कुल 1,460 गौधामों की स्थापना करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रदेश में स्थापित होंगे 1460 गौधाम

घुमन्तू एवं निराश्रित पशुधन के व्यवस्थापन हेतु शासन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग रायपुर ने गौधाम योजना (Chhattisgarh Gaudham Yojana) के तहत 1460 गौधामों की स्थापना की स्वीकृति प्रदान की गई। प्रत्येक विकासखंड में उत्कृष्ट 10 गौठानों का चयन कर गौधाम विकसित किए जाएंगे। 408 आवेदनों में से 151 आवेदनों को प्रशासकीय स्वीकृति दी जा चुकी है। 88 गौधामों का पंजीयन पूर्ण अब तक किए जा चुके हैं। वर्तमान में संचालित 42 गौधामों में लगभग 5 हजार 109 निराश्रित पशुओं को संरक्षण दिया जा रहा है।

राष्ट्रीय राजमार्गों के पास के गौठानों को प्राथमिकता

Chhattisgarh Gaudham Yojana संयुक्त संचालक (पशु चिकित्सा सेवाएं) से मिली जानकारी के अनुसार, प्रथम चरण में ऐसे गौठानों का चयन किया गया है जो राष्ट्रीय राजमार्गों के समीप स्थित हैं और जहां सभी आवश्यक अधोसंरचनाएं पूर्ण हैं। गौधामों का संचालन स्वयंसेवी संस्थाओं, पंजीकृत गौशालाओं, एनजीओ, एफपीओ और ट्रस्ट के माध्यम से किया जाएगा। हाल ही में पशुधन विकास विभाग ने नियमों में संशोधन कर ग्राम पंचायतों को गौधाम संचालन में प्राथमिकता दी है। इसके अलावा शहरी गौठानों को भी इस योजना में शामिल किया गया है।

चयन और स्वीकृति की पारदर्शी प्रक्रिया

  गौधाम स्थापना के लिए प्रक्रिया को काफी सख्त और पारदर्शी बनाया गया है। जिला स्तरीय समिति और कलेक्टर की अनुशंसा के बाद पंचायत से अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया जाता है। भौतिक सत्यापन के बाद आवेदन छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजे जाते हैं। आयोग की क्रियान्वयन समिति हर 3 महीने में होने वाली बैठक में इन आवेदनों की विस्तृत समीक्षा करती है। समीक्षा के पश्चात आवेदनों को अंतिम प्रशासकीय स्वीकृति के लिए शासन को भेजा जाता है, जिसके बाद अनुबंध और पंजीयन की कार्यवाही पूरी की जाती है।

ग्रामीण व कृषि अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल

Chhattisgarh Gaudham Yojana सरकार का मानना है कि गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति और कृषि व्यवस्था का मुख्य आधार है। ग्राम पंचायतों को संचालन का अधिकार मिलने और शहरी गौठानों को योजना में जोड़ने से भविष्य में गौधामों की संख्या में और वृद्धि होगी। वर्तमान में विभिन्न जिलों से नए गौधामों की स्थापना हेतु लगातार आवेदन प्राप्त हो रहे हैं, जिन पर त्वरित कार्यवाही जारी है।

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छत्तीसगढ़ में कुल कितने गौधाम बनाए जाएंगे?

राज्य सरकार ने गौधाम योजना के तहत 1460 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य रखा है।

गौधाम योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?

घुमंतू और निराश्रित पशुओं को सुरक्षित आश्रय देना, गौ-संरक्षण को बढ़ावा देना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना।

गौधामों का संचालन कौन करेगा?

ग्राम पंचायतों, पंजीकृत गौशालाओं, स्वयंसेवी संस्थाओं, एनजीओ, एफपीओ और ट्रस्ट के माध्यम से संचालन किया जाएगा।

अभी तक कितने गौधामों को मंजूरी मिली है?

अब तक 151 गौधामों को प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है तथा 88 का पंजीयन पूरा हो चुका है।

पहले चरण में किन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है?

राष्ट्रीय राजमार्गों के पास स्थित और आवश्यक सुविधाओं से युक्त गौठानों को पहले चरण में प्राथमिकता दी गई है।