Chhattisgarh Madrasa Board News/Image Credit: IBC24.in
Chhattisgarh Madrasa Board News: रायपुर: छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ सलीम राज ने प्रदेश के मु्ख्यमंत्री को एक पत्र लिखकर मांग की है कि, उत्तराखंड की तरह छग में भी मदरसा बोर्ड को पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए। सलीम राज की दलील है कि मदरसा बोर्ड को सरकार हर साल अनुदान देती है, बावजूद इसके वो सिर्फ और सिर्फ दीनी तालीम दी जाती है। जबकि वक्त के साथ चलने के लिए अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को भी आधुनिक शिक्षा पाने का अधिकार है। मांग पर सरकार का कहना है कि, इससे जुड़े तथ्यों का परीक्षण कराया जाएगा, तभी कोई फैसला हो सकेगा।
हालांकि, विपक्ष के मुताबिक मदरसा बोर्ड को भंग करने की सोच ही असंवैधानिक है।
Chhattisgarh Madrasa Board News: देश में मदरसा बोर्ड को भंग करने की शुरूआत हाल ही में उत्तराखंड से हो चुकी है, जहां 1 जुलाई 2026 से राज्य मदरसा बोर्ड को बंद कर, नई इकाई ‘उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ USMEA गठन होगा। ये प्राधिकरण मुस्लिम समेत सिख, ईसाई, बौद्ध, जैन और पारसी जैसे सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों की देखरेख करेगा। वर्तमान में छग में 450 से अधिक मदरसे रजिस्टर्ड हैं, जिनमें तकरीबन 200 से ज्यादा बच्चे पढ़ते हैं। जाहिर है अगर छत्तीसगढ़ भी मदरसा बोर्ड भंग कर नई व्यवस्था लागू करता है तो उसका सीधा-सीधा असर इन सभी मदरसों, इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों और पढ़ाने वाले शिक्षकों पर पड़ेगा। सवाल ये कि क्या इस पहल को कौन सियासत के चश्मे से देख रहा है और किसे अल्पसंख्यक बच्चों की वाकई फिक्र है?
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