छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में उसका प्रारूप तैयार करने समिति का गठन

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छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में उसका प्रारूप तैयार करने समिति का गठन

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  • Publish Date - April 15, 2026 / 04:12 PM IST,
    Updated On - April 15, 2026 / 04:12 PM IST

रायपुर, 15 अप्रैल (भाषा) छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने के संबंध में उसका प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रिपरिषद ने अपनी एक बैठक में राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने के संबंध में उसका प्रारूप तैयार करने के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में एक समिति का गठन करने का निर्णय लिया।

उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने समिति के सदस्यों के मनोनयन के लिए मुख्यमंत्री को अधिकृत किया है।

अधिकारियों ने बताया कि छत्तीसगढ़ में फिलहाल विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण, भरण-पोषण एवं पारिवारिक मामलों से संबंधित विवादों में विभिन्न धर्मों के अनुसार अलग-अलग ‘पर्सनल लॉ’ लागू हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य को सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश दिया गया है लेकिन अलग-अलग कानूनों के कारण वैधानिक प्रक्रिया में असमानता उत्पन्न होती है, जिससे न्याय प्रक्रिया जटिल होती है, ऐसे में कानून को सरल, एकरूप और न्यायसंगत बनाने के लिए समान नागरिक संहिता लागू करना आवश्यक माना जा रहा है, जिससे धार्मिक और लैंगिक समानता को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बताया कि इसी दिशा में छत्तीसगढ़ में एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया है, जो राज्य के नागरिकों, संगठनों तथा विशेषज्ञों से व्यापक सुझाव लेकर समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करेगी।

अधिकारियों ने कहा कि समिति की सिफारिशों के आधार पर तैयार प्रारूप को विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत मंत्रिपरिषद से अनुमोदन के बाद विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे राज्य में एक समान और पारदर्शी नागरिक कानून व्यवस्था स्थापित हो सके।

अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय भी लिया है कि महिलाओं के नाम पर होने वाले भूमि रजिस्ट्रेशन पर शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी की जाएगी जिसका उद्देश्य महिलाओं को संपत्ति अर्जन के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।

उन्होंने कहा कि इस निर्णय से सरकार को लगभग 153 करोड़ रुपये राजस्व की कमी होगी, लेकिन महिला सशक्तीकरण के लिए यह महत्वपूर्ण कदम है।

उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के सैनिकों, भूतपूर्व सैनिकों एवं उनकी विधवाओं के हित में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया, जिसके तहत उन्हें जीवनकाल में एक बार छत्तीसगढ़ के भीतर 25 लाख रूपए तक की संपत्ति (भूमि/भवन) खरीदने पर स्टाम्प शुल्क में 25 प्रतिशत की छूट दी जायेगी।

उन्होंने कहा कि देश सेवा में समर्पित सैनिकों का जीवन प्रायः स्थानांतरण और अस्थायित्व से भरा होता है, जिसके बाद वे स्थायी निवास के लिए संपत्ति खरीदते हैं, ऐसे में यह निर्णय उन्हें आर्थिक राहत प्रदान करेगा।

अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत (उत्खनन एवं व्यवसाय) नियम, 2025 में संशोधन का अनुमोदन किया गया जिसके तहत अब केन्द्र अथवा राज्य सरकार के सार्वजनिक उपक्रम जैसे ‘छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्परेशन लिमिटेड’ के लिए रेत खदानें आरक्षित की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद की बैठक में छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम, 2015 में व्यापक संशोधन के प्रस्ताव का अनुमोदन किया गया जिसका उद्देश्य खनन क्षेत्र में पारदर्शिता, नियंत्रण और राजस्व वृद्धि सुनिश्चित करना, अवैध खनन को रोकना तथा प्रक्रिया को सरल बनाना है।

अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने पशुओं को संक्रामक रोगों से बचाने के लिए आवश्यक टीकाद्रव्यों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ‘नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी)’ की सहयोगी कंपनी ‘इंडियन इम्यूनोलॉजिकल्स लिमिटेड’ (हैदराबाद) से टीकों की खरीद की अनुमति प्रदान की है।

उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त मंत्रिपरिषद की बैठक में आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरक की व्यवस्था तथा राज्य में रसोई गैस की उपलब्धता की स्थिति की समीक्षा की गई।

भाषा संजीव राजकुमार

राजकुमार