Dhamtari Funeral Dispute : रास्ते पर बैरिकेटिंग, 5 घंटे चला विवाद!.. ग्रामीण बोले- हम नहीं करने देंगे महिला का अंतिम संस्कार, जानिए क्यों नाराज थे लोग

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धमतरी के श्यामतराई गांव में 50 वर्षीय महिला के अंतिम संस्कार को लेकर विवाद खड़ा हो गया। परिवार की धार्मिक मान्यताओं को लेकर ग्रामीणों ने मुक्तिधाम जाने वाला रास्ता बांस-बल्लियों से बंद कर दिया। करीब 5 घंटे की समझाइश के बाद प्रशासन की मौजूदगी में गांव की सीमा के बाहर अंतिम संस्कार कराया गया।

  • Reported By: Devendra Mishra

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  • Publish Date - August 8, 2026 / 04:38 PM IST,
    Updated On - August 8, 2026 / 04:38 PM IST

Dhamtari Funeral Dispute : Image Source : screengrab

HIGHLIGHTS
  • मृतका का परिवार पिछले करीब 10 वर्षों से संत रामपाल पंथ से जुड़ा बताया जा रहा है।
  • ग्रामीणों ने पारंपरिक मुक्तिधाम जाने वाले रास्ते पर बैरिकेडिंग कर शवयात्रा रोक दी।
  • करीब 5 घंटे की बातचीत के बाद गांव की सीमा के बाहर अंतिम संस्कार कराने पर सहमति बनी।

धमतरी : Dhamtari Funeral Dispute :  छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के श्यामतराई गांव में एक 50 वर्षीय महिला के निधन के बाद अंतिम संस्कार को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया। मृतका के परिवार के अन्य पंथ से जुड़े होने के कारण ग्रामीणों ने पारंपरिक मुक्तिधाम का रास्ता बांस-बल्लियां लगाकर बंद कर दिया। इस घटना से पूरे गांव में तनाव का माहौल बन गया, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।

क्या है पूरा मामला ?

मिली जानकारी के अनुसार श्यामतराई निवासी गीता बाई साहू (50 वर्ष) के निधन के बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए गांव के मुक्तिधाम ले जा रहे थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने रास्ते पर बैरिकेडिंग कर शवयात्रा रोक दी। ग्रामीणों का तर्क था कि गांव के मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार केवल पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार ही होगा।

मृतिका पिछले 10 वर्षों से संत रामपाल पंथ जुड़ा हुआ है

बताया जा रहा है कि मृतका का परिवार पिछले 10 वर्षों से संत रामपाल पंथ से जुड़ा हुआ था और वे अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करना चाहते थे। बात बढ़ने पर मौके पर हंगामा शुरू हो गया और स्थिति तनावपूर्ण हो गई। सूचना मिलते ही पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने ग्रामीणों और परिजनों के साथ अलग-अलग बैठकें कीं और करीब 5 घंटे तक समझाइश का दौर चला।

शव का अंतिम संस्कार गांव की सीमा के बाहर किया

प्रशासन की मौजूदगी में लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्ष एक समाधान पर पहुंचे। सहमति बनी कि शव का अंतिम संस्कार गांव की सीमा के बाहर किया जाएगा। इसके बाद परिजन और प्रशासन मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से अंतिम विदाई की प्रक्रिया पूरी करा सके और गांव में विवाद शांत हुआ।

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