Reported By: SuryaPrakash Chandrawanshi
,Dharmantaran In Kawardha | Photo Credit: AI
कवर्धा: Dharmantaran In Kawardha प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर कानून बनाए गए हैं, इसके बाद भी ऐसी घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही है। (Chhattisgarh Conversion News) लगातार अलग-अलग हिस्सों से धर्मांतरण का मामला सामने आ रहा है। ऐसा ही एक मामला कवर्धा जिले से सामने आया है, जहां चंगाई सभा की आड़ में धर्मांतरण कराया जा रहा था। सूचना मिलते ही हिंदू संगठन के लोग वहां पहुंचे और इसका विरोध किया।
Kavardha Conversion Case मिली जानकरी के अनुसार, मामला तरेगांव थाना लालमाटी गांव का है। जहां एक बंद कमरे में चंगाई सभा की आड़ में प्रार्थना आयोजित की जा रही थी। इस मामले की सूचना मिलते ही हिंदू संगठन के लोग वहां पहुंचे और इसका विरोध किया। हिंदू संगठनों 2 पास्टर पर आरोप लगाया है। संगठन का आरोप है कि इलाज के नाम पर धर्मांतरण कराया जा रहा था।
ग्रामीणों ने भी आरोप लगाया कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के समाधान का भरोसा देकर उन्हें दूसरे धर्म को अपनाने के लिए कहा गया था। हालांकि, जब उनकी स्वास्थ्य समस्याओं में कोई सुधार नहीं हुआ तो कुछ लोग दोबारा सनातन धर्म में लौट आए। पुलिस ने इस मामले में गांव के दो पास्टर, एक फादर और रायपुर के एक अन्य फादर के खिलाफ शिकायत दर्ज की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने संबंधित लोगों को थाने बुलाकर पूछताछ की। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है।
आपको बता दें कि इससे पहले नारायणपुर जिले के भरण्डा गांव में धर्मांतरण को लेकर विवाद गहरा गया। धर्मांतरण के आरोपों के बीच दो पक्षों के बीच मारपीट हुई, जिसके बाद गांव में तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। हालात को देखते हुए प्रशासन ने मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया है।
गांव के कुछ ग्रामीणों का आरोप है कि एक कार में सवार होकर कुछ लोग भरण्डा गांव पहुंचे थे। ग्रामीणों का दावा है कि ये लोग स्थानीय आदिवासियों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे थे। इसी बात को लेकर गांव में विवाद शुरू हुआ, जो देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच झड़प और मारपीट में बदल गया। विवाद बढ़ने के बाद आदिवासी समुदाय और मतांतरित समुदाय के लोगों के बीच तनाव की स्थिति पैदा हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।
Christian Society Protest News: विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, अवैध तरीके से धर्मांतरण कराने पर दोषी पाए जाने पर 7 से 10 साल तक की सजा और कम से कम 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि पीड़ित नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति या अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित हो, तो सजा 10 से 20 साल तक की जेल और न्यूनतम 10 लाख रुपये जुर्माने तक बढ़ाई जा सकती है। (Christian Society Protest News) वहीं, सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में 10 साल से लेकर आजीवन कारावास और कम से कम 25 लाख रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।