(अपराजिता उपाध्याय)
ग्लास्गो, 25 जुलाई (भाषा) ग्लास्गो में रहने वाले मोहम्मद अयूब कुरैशी की पहचान सिर्फ एक मशहूर रेस्तरां मालिक के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रमंडल खेलों में पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व करने वाले लॉन बॉल्स खिलाड़ी के रूप में भी है जिन्होंने खेल भावना की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने सभी का दिल जीत लिया।
कुरैशी अपने अधिकांश दिन इस बात का ध्यान रखते हुए बिताते हैं कि उनके ‘आलीशान तंदूरी’ रेस्तरां में बनने वाले रोगन जोश में मसालों का संतुलन बिल्कुल सही हो, लेकिन राष्ट्रमंडल खेलों के दौरान उन्होंने रसोई का एप्रन उतारकर लॉन बॉल्स के मैदान में कदम रखा।
स्कॉटलैंड के पूर्व विश्व चैंपियन जेसन बैंक्स से मुकाबला हारने के कुछ ही मिनट बाद कुरैशी ने मुस्कुराते हुए उनसे हाथ मिलाया और खेल भावना का बेहतरीन उदाहरण पेश करते हुए कहा, ‘‘मेरे रेस्तरां आइए, साथ में खाना खाते हैं। ’’
इस पर बैंक्स ने ऐसा जवाब दिया कि वहां मौजूद सभी लोग हंस पड़े। उन्होंने कहा, ‘‘मैं इस हफ्ते वहां नहीं गया। मैच से पहले मुझे डर था कि कहीं ये मेरे खाने में ज्यादा मसाले न डाल दें। ’’
यह मजाक इसलिए भी पसंद किया गया क्योंकि ग्लास्गो की लॉन बॉल्स बिरादरी में कुरैशी काफी लोकप्रिय हैं जिन्हें सभी ‘चिको’ के नाम से जानते हैं,
पाकिस्तान की जर्सी पहनने से बहुत पहले ही कुरैशी ग्लास्गो के खानपान जगत में अपनी अलग पहचान बना चुके थे।
बैटलफील्ड रोड पर स्थित उनका ‘आलीशान तंदूरी’ रेस्तरां स्थानीय लोगों की पसंदीदा जगहों में शामिल है जिसे गूगल पर 4.5 स्टार रेटिंग मिली हुई है। यहां वर्षों से ग्राहकों को तरह-तरह की करी, तंदूरी व्यंजन और नान परोसे जाते हैं।
हालांकि उनकी जर्सी पर पाकिस्तान का नाम लिखा था, लेकिन ग्लास्गो पिछले 50 वर्षों से उनका घर रहा है।
यह राष्ट्रमंडल खेलों में कुरैशी की पहली उपस्थिति नहीं थी। उन्होंने 2014 में ग्लास्गो राष्ट्रमंडल खेलों में भी पाकिस्तान का प्रतिनिधित्व किया था और 2018 के गोल्ड कोस्ट खेलों में भी हिस्सा लिया था। इस तरह वह पाकिस्तान के उन चुनिंदा खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं जिन्हें इस खेल में सबसे अधिक पहचान मिली है।
जहां पाकिस्तान में क्रिकेट का दबदबा है, वहीं लॉन बॉल्स अब भी अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय खेल है। हालांकि स्कॉटलैंड में बसे पाकिस्तानी समुदाय के बीच इस खेल ने धीरे-धीरे अपनी जगह बनाई है। स्थानीय क्लबों के सहयोग से विभिन्न पृष्ठभूमि के खिलाड़ियों ने इस खेल को अपनाया है।
भाषा नमिता आनन्द
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