रायपुरः Foreign Funding in Naxal Areas: छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित इलाकों में विदेशी फंडिंग का चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारत की प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने बेंगलुरू से एक विदेशी नागरिक को हिरासत में लिया। हैरानी की बात यह है कि इनके द्वारा पैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में निकाले गए, जिसमें छत्तीसगढ़ का बस्तर और धमतरी जिला भी शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद जहां नक्सलवाद और धर्मांतरण को विदेशी फंडिंग की बातों पर मुहर लगती दिख रही हैं, वहीं प्रदेश में भाजपा ने कांग्रेस पर सीधा हमला बोलकर सियासी संग्राम की शुरुआत भी कर दी है।
प्रेस नोट बताती है कि देश भर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में 95 करोड़ की विदेशी फंडिंग महज एक साल में की गई है। छत्तीसगढ़ में साढ़े 6 करोड़ रुपये की फंडिंग हुई हैं। ईडी के मुताबिक भारत में द टिमोथी इनिशिएटिव संस्था के कामकाज को लेकर देशभर के 6 ठिकानों पर कार्रवाई की गई। इस कड़ी में बेंगलुरू एयरपोर्ट से मिकाह मार्क नामक विदेशी नागरिक को हिरासत में लिया गया। इसके पास से अमेरिका के ट्रूइस्ट बैंक के 24 डेबिट कार्ड बरामद हुए, जिसके जरिए देशभर के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में एटीएम से 95 करोड़ रुपये निकाले गए और उसे टीटीआई से जुड़े कामों पर खर्च किया गया भारी भरकम राशि निकालने में ऑर्गेनाइज्ट नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया एजेंसी कहती है कि देश के नक्सल प्रभावित क्षेत्र में कैश आधारित इकोनॉमी का उभरना ना सिर्फ देश की सुरक्षा की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि आर्थिक एकता पर भी खतरा उत्पनन करता है।
ईडी के मुातबिक इस पूरी राशि की निकासी और उसके खर्चों का पूरा हिसाब-किताब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर रखा गया है, जिसे भारत से बाहर ऑपरेट किया गया है टीटीआई भारत में फॉरेंन कन्ट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (एफसीआरए) के तहत रजिस्टर्ड भी नहीं है और विदेशी बैंक के एटीएम कार्ड के जरिए देश में पैसे निकाल कर खपाने में वैधानिक प्रक्रिया का भी उल्लंघन किया गया है। ईडी के इस खुलासे ने देश में नक्सलवाद के फलने फूलने और उसकी आड़ में आदिवासी क्षेत्रों में धर्मांतरण के थ्योरी को एक बार फिर से बल दे दिया है इसी के साथ प्रदेश में सियासी संग्राम भी छिड़ गया है
भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोल दिया है। भाजपा के विधायक पुरंदर मिश्रा ने कहा कि इसी से साफ हो जाता है कि कांग्रेस सरकार में क्यों ईडी के प्रवेश को छग में प्रतिबंधित किया गया था टीटीई ने कांग्रेस और नक्सलियों की मदद से प्रदेश में धर्मांतरण को फैलाया है। अब कांग्रेस को बता देना चाहिए कि विदेशी डेबिट कार्ड के जरिए उसे कितना फंड मिला है? साथ ही यह भी कहा कि कांग्रेस सरकार के समय छग में कम से कम 500 चर्च बने हैं, उसकी भी जांच होनी चाहिए। वहीं भाजपा के सांसद संतोष पाण्डेय ने भी हमला बोलते हुए कहा कि शायद इसी लिए पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने प्रदेश में ईडी के प्रवेश को रोका था। उन्होंने कहा कि पूर्व सीएम के पिता नंद कुमार बघेल कहां जाते थे, किससे मिलते थे, यह भी स्पष्ट होना चाहिएय़ उनके समय छग से कितने लोगों को दिल्ली ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था उन्होंने कहा कि आने वाले समय में एफसीआरए में भी जल्द सरकार संशोधन ला सकती है।
Foreign Funding in Naxal Areas: उधर, भाजपा के हमले पर कांग्रेस ने भी पलटवार कर दिया है। कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि ईडी का मूल काम ही विदेशी फंडिंग को रोकना था, लेकिन भाजपा ने उसे विपक्ष के पीछे छोड़ रखा था। अब जो कार्रवाई हुई है और 95 करोड़ रुपये निकासी का मामला भी भाजपा सरकार के कार्यकाल का है। लिहाजा इससे कांग्रेस के आरोप की ही पुष्टि होती है कि भाजपा काल में धर्मांतरण बढ़ा है। राजनीति आरोप प्रत्यारोप से हटकर ईडी की ये कार्रवाई ना सिर्फ हैरान करने वाली है बल्कि सीधे सीधे देश में अशांति फैलाने और धर्मांतरण के जरिए वर्ग संघर्ष को पैदा करने की विदेशी साजिश का पर्दाफाश करती है। ऐसे में देखना होगा कि आगे की कार्रवाई में और क्या खुलासा होता है और क्या इस साजिश के तार कहीं किसी राजनीतिक दल और संगठन से भी तो नहीं जुड़ता है।