छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर तीखी बहस, भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए
छत्तीसगढ़ विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर तीखी बहस, भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए
रायपुर, 17 जुलाई (भाषा) छत्तीसगढ़ विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ कांग्रेस द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर जोरदार बहस हुई। इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच शासन, भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और आदिवासी कल्याण जैसे मुद्दों पर तीखी नोकझोंक हुई।
अविश्वास प्रस्ताव के विरोध में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बोलने के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों के बीच गर्मागर्म बहस छिड़ गई, जिससे सदन में हंगामे की स्थिति उत्पन्न हो गयी। शोर-शराबे के बीच पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी।
पांच दिवसीय मानसून सत्र के अंतिम दिन दोपहर बाद अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा शुरू हुई। इस दौरान कांग्रेस ने राज्य सरकार की कथित विफलताओं को रेखांकित करते हुए 136 बिंदुओं वाला ‘आरोप-पत्र’ सदन में पेश किया। इस पर चर्चा देर रात तक चलने की संभावना है।
चर्चा की शुरुआत करते हुए नेता प्रतिपक्ष चरण दास महंत ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार हर मोर्चे पर विफल रही है और उसने किसानों, आदिवासियों, युवाओं तथा महिलाओं के साथ ‘‘विश्वासघात’’ किया है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने अपने कार्यकाल के 135 सप्ताह पूरे कर लिये हैं और 136वें सप्ताह में प्रवेश कर चुकी है। इसी कारण विपक्ष ने उसकी कथित विफलताओं को उजागर करने के लिए 136 बिंदुओं का आरोप-पत्र तैयार किया है।
महंत ने कहा, ‘‘यह इस बात का दस्तावेजी विवरण है कि छत्तीसगढ़ की तीन करोड़ जनता को किस तरह निराश किया गया है।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल का हर सप्ताह किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं के खिलाफ ‘नई साजिशों’ का गवाह रहा है।
उन्होंने उत्तर छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य वन क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए सरकार पर पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील इस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और कोयला खनन को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
महंत ने जुलाई 2022 में विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित उस प्रस्ताव का भी उल्लेख किया, जिसमें हसदेव अरण्य के कोयला ब्लॉक में खनन को निरस्त करने की मांग की गई थी।
उन्होंने आरोप लगाया कि (भाजपा के चुनाव जीतने के बाद) मौजूदा मुख्यमंत्री के पद संभालने से पहले ही खनन की अनुमति देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी।
महंत ने हसदेव अरण्य को ‘मध्य भारत का फेफड़ा’ बताते हुए दावा किया कि सरकार ने 11 दिसंबर को राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को हसदेव अरण्य वन क्षेत्र की 91 हेक्टेयर भूमि में खनन की अनुमति दे दी और इस तरह करीब 15,000 पेड़ों के लिए ‘मौत का फरमान’ दे दिया गया था।
उन्होंने इस फैसले को ‘‘छत्तीसगढ़ की संप्रभुता पर हमला’’ करार देते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार दिल्ली और राजस्थान के उद्योगपतियों के इशारे पर अपने जंगलों को नष्ट होने दे रही है।
महंत ने कहा, ‘‘आप किसी और का महल बनाने के लिए अपनी ही जड़ें काट रहे हैं। बाहरी उद्योगपतियों के कहने पर छत्तीसगढ़ के जंगलों को नष्ट होने देना राज्य का अपमान है। जिस तरह से ये मंजूरी दी गई, उसकी मैं कड़ी निंदा करता हूं।’’
महंत ने भगवान राम का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा अक्सर उन्हें छत्तीसगढ़ का ‘‘भांजा’’ बताती है, लेकिन पार्टी उनकी यात्रा से जुड़े जंगलों की रक्षा करने में विफल रही।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इसके बजाय आपने इन जंगलों को अपने मित्रों और उद्योगपतियों के हवाले कर दिया। आज छत्तीसगढ़ पर एक उद्योगपति का दबदबा लगभग कायम है और इसका खामियाजा हमें मानव-हाथी संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के रूप में भुगतना पड़ रहा है।’’
महंत ने यह भी आरोप लगाया कि हसदेव अरण्य क्षेत्र के कोयला भंडार का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘जिन खदानों का आवंटन 15 वर्षों के लिए किया गया था, उनका भंडार नौ वर्षों में ही समाप्त हो गया। हसदेव अरण्य में लगभग 170 प्रकार के औषधीय पौधे और वृक्ष पाये जाते हैं। समझ नहीं आता कि इसे विवेकहीन सरकार कहूं या संवेदनहीन।’’
कांग्रेस नेता ने कानून-व्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार में महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं।
उन्होंने जून 2024 में बलौदाबाजार में हुई हिंसा का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों द्वारा जिला कलेक्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय में आग लगाए जाने की घटना को रोकने में सरकार विफल रही।
महंत ने कोरिया जिले में कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के एक मामले का हवाला देते हुए दावा किया कि भाजपा सरकार में महिलाएं सुरक्षित नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने ‘विजन डॉक्यूमेंट-2047’ में कृषि की उपेक्षा की है।
महंत ने कहा कि राज्य की लगभग 70 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर होने के बावजूद इस क्षेत्र के योगदान को कमतर आंका गया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा शुरू की गई बेरोजगारी भत्ता योजना बंद कर दी गई है।
महंत ने दावा किया कि पिछले खरीफ विपणन सत्र में करीब दो लाख किसान अपना धान नहीं बेच सके।
कांग्रेस नेता ने पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम (पेसा) के क्रियान्वयन, कथित अवैध रेत खनन, आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण, अबूझमाड़ में कथित पेड़ों की कटाई, भारतमाला सड़क परियोजना और आबकारी विभाग में 500 करोड़ रुपये के कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।
बहस शुरू होने से पहले भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने कहा कि राज्य के इतिहास में यह पहली बार है जब नेता प्रतिपक्ष अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा की शुरुआत कर रहे हैं।
उन्होंने टिप्पणी की कि इससे उनकी अपनी पार्टी के विधायकों पर उनके विश्वास की कमी झलकती है।
विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह ने बहस शुरू होने से पहले सदस्यों से संसदीय परंपराओं का पालन करने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की।
उन्होंने चर्चा के दौरान व्यक्तिगत या अनावश्यक आरोपों से बचने की भी सलाह दी।
भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार और नीतिगत विफलताओं का आरोप लगाते हुए भर्ती प्रक्रिया, भारतमाला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण, उद्योगों को दी गई बिजली शुल्क में छूट, आबकारी नीति तथा राज्य के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कांग्रेस से शराबबंदी और आवास निर्माण जैसे कथित अधूरे चुनावी वादों पर भी सवाल किए।
अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक कवासी लखमा ने आरोप लगाया कि राज्य में आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद आदिवासी आज भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार आबकारी और कोयला समेत कई कथित घोटालों में लिप्त थी। उन्होंने दावा किया कि साय सरकार ने सुशासन सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार ने कांग्रेस शासनकाल में हुए छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) की भर्ती में कथित घोटाले की जांच के आदेश दिए हैं।
शर्मा के भाषण के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी का उल्लेख किए जाने पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई, जिसके बाद सदन में हंगामा मच गया।
कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने शर्मा के आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे, जबकि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने उनके हावभाव पर आपत्ति जताई। हंगामे के बीच पीठासीन अधिकारी ने सदन की कार्यवाही पांच मिनट के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद बहस फिर शुरू हुई।
कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने कहा कि भाजपा सदस्य बार-बार पिछली कांग्रेस सरकार का जिक्र कर रहे हैं।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा लगता है जैसे सत्ता पक्ष ‘काल यात्रा’ कर रहा है और वर्तमान मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए अतीत की बातें उठा रहा है।
भाषा राखी सुरेश
सुरेश

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