Bengali community seeking permission to purchase and sell land
पखांजूर। जब भारत और पाकिस्तान बना उसके पश्चात पाकिस्तान में हिंदुओं के ऊपर मुसलमान अत्याचार करने लगे। तब बड़ी तादात में हिन्दू पलायन कर भारत आने लगे और जब पाकिस्तान से अलग हो कर बंगालदेश बना। तब भी हिन्दुओं का शरणार्थियों के रूप से भारत आना सन 1952 /55 से शुरू हुआ। उस वक्त भारत सरकार ने उन हिन्दुओं को भारत के कई राज्य में विस्थापित किया, जो की आज 60 से 70 साल हो चुका। जब शरणार्थियों को जगह जगह विस्थापित किया गया, जिसमें से हजारों की संख्या में सहरणार्थियो को मध्यप्रदेश /छत्तीसगढ़ के पखांजुर में पखांजुर विलेज नम्बर के हिसाब से 133 गांव (PV) बिठाया गया था।
भूमि खरीदी व बिक्री की अनुमति देने की मांग
शासन के माप दंड के अनुसार उन शरणार्थियों को कई तरह का सहयोग किया जिसमें खेती करने के लिए भूमि आबंटन किया। आज कृषि कार्य करने के लिए उपयोग करने में आ रहा है, लेकिन कृषि कार्य करने के लिए जो भूमि भारत सरकार ने उन विस्थापितो को दिए थे वो आज कम पड़ने लगा है। इसका कारण यह है कि पहले परिवार में 4/5 सदस्य थे, जो आज बढ़ कर इसके 8 से 10 गुना बढ़ चुका हैं। जिसके चलते क्षेत्र के विगत कई सालों से इन बंगाली समुदाय के लोग अपनी कृषि कार्य करने के लिए भूमि की खरीदी व बिक्री करने की अनुमति देने की मांग कर रहे है, लेकिन शासन प्रशासन किसी ना किसी तरह से प्रतिबंध लगा रहे हैं।
अक्टूबर 2022 में ये आदेश हुआ था पारित
अब शासन का एक आदेश सन 2022 के अक्टूबर महीने में प्रस्ताव पारित किया। जिसमें 20 बरसों से ज्यादा समय भूस्वामी अधिकार प्राप्त पत्ताधारी अपनी भूमि का स्वतंत्र रूप से कुछ भी कर सकता है, लेकिन आज तक संबंधित आदेश का क्रियान्वयन नहीं हो रहा है। इस सम्बंध में क्षेत्रीय विधायक ने कहा कि वह शासन से चर्चा करेंगे जिससे कोई ना कोई हल लिकलेगा। अब क्षेत्र के भूस्वामी पट्टा धारी विस्थापित लोग पूर्ण रूप से खरीदी बिक्री का अधिकार मांग कर रहे है ।
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