Kondagaon POCSO Case: चॉकलेट का लालच देकर 4 साल की मासूम से हैवानियत, कोर्ट ने दरिंदे को सुनाई कड़ी सजा

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Kondagaon POCSO Case: चॉकलेट का लालच देकर 4 साल की मासूम से हैवानियत, कोर्ट ने दरिंदे को सुनाई कड़ी सजा

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  • Publish Date - July 30, 2026 / 04:05 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 04:05 PM IST

Kondagaon POCSO Case: चॉकलेट का लालच देकर 4 साल की मासूम से हैवानियत, कोर्ट ने दरिंदे को सुनाई कड़ी सजा /image: Social Media

HIGHLIGHTS
  • 4 साल की बच्ची से यौन अपराध के दोषी को 20 साल की सश्रम कारावास की सजा
  • POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता के तहत कोर्ट ने आरोपी को दोषी ठहराया
  • कोंडागांव जिला न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर सुनाया फैसला

कोंडगांव। Kondagaon POCSO Case: छत्तीसगढ़ में 4 साल की मासूम से दरिंदगी करने वाली आरोपी को कोर्ट ने कड़ी सजा सुनाई है। जिला न्यायालय कोण्डागांव के अपर सत्र न्यायाधीश प्रतिभा मरकाम ने मासूम से अनाचार के मामले में आरोपी को 20 साल की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज था, जिसमें न्यायालय ने आरोपी को दोषी पाते हुए यह फैसला सुनाया।

मिली जानकारी के अनुसार, ये पूरी घटना 4 अप्रैल 2025 की है और मामले की रिपोर्ट 5 अप्रैल 2025 को सिटी कोतवाली कोण्डागांव में दर्ज की गई थी। आरोपी उमेश राठौर (27) निवासी बालासार कोण्डागांव के खिलाफ नाबालिग बालिका को चॉकलेट देने का लालच देकर बहला-फुसलाकर ले जाने और उसके साथ लैंगिक अपराध करने का आरोप था।

500 रुपये अर्थदंड की सजा

मामले में छत्तीसगढ़ राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक जशवंत गौतम ने न्यायालय में प्रभावी पैरवी की। सुनवाई के बाद पीठासीन न्यायाधीश प्रतिभा मरकाम ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की धारा 65 (2) एवं पॉक्सो अधिनियम की धारा 6 के तहत दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। लोक अभियोजक हेमंत गोस्वामी ने बताया कि अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अपराध को प्रमाणित किया, जिसके बाद न्यायालय ने आरोपी को कठोर दंड दिया।

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यह मामला कहां का है?

यह मामला छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले का है।

आरोपी को कितनी सजा सुनाई गई है?

आरोपी को 20 वर्ष के सश्रम कारावास और ₹500 के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

यह मामला किस कानून के तहत दर्ज था?

मामला POCSO Act और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया था।

घटना कब हुई थी?

घटना 4 अप्रैल 2025 की बताई गई है और रिपोर्ट 5 अप्रैल 2025 को दर्ज हुई थी।

कोर्ट ने फैसला किस आधार पर सुनाया?

न्यायालय ने अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर आरोपी को दोषी पाया।