Naxalite Paparao Surrenders | Photo Credit: IBC24
जगदलपुर: Naxalite Paparao Surrenders छत्तीसगढ़ में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ चल रहे अभियानों के बीच को एक बड़ी सफलता मिली। नक्सलियों के वरिष्ठ कमांडर पापा राव ने मंगलवार को अपने दल के 17 सदस्यों के साथ सुरक्षाबलों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। जिसके बाद आज वे औपचारिक सरेंडर करेंगे। उनके साथ DVCM प्रकाश मड़वी, अनिल ताती सहित 18 नक्सली भी डिप्टी सीएम विजय शर्मा के सामने सरेंडर करेंगे। इस दौरान पुलिस/केंद्रीय सुरक्षा बल और जिला प्रशासन की टीम मौजूद रहेंगे।
Naxalite Paparao Surrenders बता दें कि कुख्यात नक्सली लीडर पापा राव मंगलवार अपने 17 साथियों के साथ बीजापुर के कुटरू में सरेंडर कर दिया। सभी ने कुटरू थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। पापा राव ने बयान देते हुए कहा कि वह पिछले 10 दिनों से हथियार छोड़ने के बारे में सोच रहे थे। उन्होंने आगे कहा कि अब वह भारत के संविधान के अनुसार सबके लिए और जनता के हित में लड़ेंगे और काम करेंगे। उन्होंने अपने सभी बचे साथियों से भी मुख्यधारा में लौटने की अपील की है।
पापा राव का नाम बस्तर के जंगलों में दहशत का पर्याय रहा है। पिछले दो दशकों से वह माओवादी संगठन की वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल रहा था। हिडमा के मारे जाने के बाद वह क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर बन गया था। 25 लाख रुपये का इनाम होने के बावजूद वह सुरक्षा बलों की कई घेराबंदियों से बच निकला। अब जब उसके सरेंडर की खबर आई है तो बस्तर के आदिवासी इलाकों में राहत की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अगर पापा राव मुख्यधारा में आ गया तो नक्सलवाद की आखिरी कड़ी भी टूट जाएगी। यह खबर इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि केंद्र सरकार ने मार्च 2026 तक बस्तर को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा है। पापा राव के मामले में सुरक्षा बलों की सफलता पूरे अभियान की सबसे बड़ी कामयाबी होगी। 2025-26 में बस्तर में अब तक सैकड़ों नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं। पापा राव का मामला अंतिम बड़ा कदम माना जा रहा है।
आपकों बता दें की पापा राव संगठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। उनके साथ बड़ी संख्या में नक्सलियों का सरेंडर होना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। पापा राव का नाम बस्तर के जंगलों में दहशत का पर्याय रहा है। पिछले दो दशकों से वह माओवादी संगठन की वेस्ट बस्तर डिवीजन की कमान संभाल रहा था। हिडमा के मारे जाने के बाद वह क्षेत्र का सबसे अनुभवी और खतरनाक कमांडर बन गया था। 25 लाख रुपये का इनाम होने के बावजूद वह सुरक्षा बलों की कई घेराबंदियों से बच निकला था।
Naxalite Paparao Surrenders पापा राव का असली नाम मंगू दादा या चंद्रन्ना है। वह सुकमा जिले के निमलगुड़ा गांव का रहने वाला है। 50 वर्ष से अधिक उम्र का यह नक्सली 1990 के दशक से माओवादी आंदोलन से जुड़ा हुआ है। वह वेस्ट बस्तर डिवीजन कमेटी का प्रमुख कमांडर है और कई बड़े हमलों की योजना बनाने का आरोप है।