शह मात The Big Debate: प्राचार्यों को नया फरमान… सख्त निर्देश पर घमासान, सरकार के फैसले पर शिक्षक संघ ने साधा निशाना, स्कूल शिक्षा के नए निर्देशों पर क्यों उठ रहे सवाल?

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New rules for Principals in Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब प्राचार्य क्लासरूम में जाकर बच्चों को पढ़ाते हुए नजर आएंगे।

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  • Publish Date - September 12, 2026 / 11:37 PM IST,
    Updated On - September 12, 2026 / 11:39 PM IST

New rules for Principals in Chhattisgarh/Image Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब प्राचार्य क्लासरूम में जाकर बच्चों को पढ़ाते हुए नजर आएंगे।
  • स्कूल शिक्षा विभाग के नए निर्देश के तहत अब प्राचार्यों को रोजाना दो कक्षाएं लेना अनिवार्य होगा।
  • सरकार के फैसले पर शिक्षक संघ ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

New rules for Principals in Chhattisgarh: रायपुर: छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में अब प्राचार्य सिर्फ प्रशासनिक जिम्मेदारियां ही नहीं निभाएंगे, बल्कि क्लासरूम में जाकर बच्चों को पढ़ाते भी नजर आएंगे। स्कूल शिक्षा विभाग के नए निर्देश के तहत अब प्राचार्यों को रोजाना दो कक्षाएं लेना अनिवार्य होगा। इसके अलावा स्कूल में उपलब्ध बड़े और अच्छे क्लासरूम का इस्तेमाल प्राचार्य केबिन या स्टाफ रूम के तौर पर नहीं किया जाएगा। क्लासरूम्स का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ अध्यापन के लिए होगा, लेकिन सरकार के फैसले पर शिक्षक संघ ने सवाल खड़े कर दिए हैं। इसपर छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र दुबे का कहना है कि प्रदेश के कई स्कूलों में आज भी पर्याप्त कक्ष नहीं हैं। प्राचार्य के पास कई प्रशासनिक और वित्तीय काम होते हैं ऐसे में रोजाना दो कक्षाएं लेने की जिम्मेदारी देना अव्यवहारिक है। शिक्षक संघ की मांग है कि सरकार पहले स्कूलों में पर्याप्त इंफ्रास्ट्रक्चर और शिक्षकों की भर्ती करे। प्राचार्यों की मौजूदा जिम्मेदारियों को देखते हुए अध्यापन कार्य को स्वैच्छिक रखा जाए।

एक तरफ शिक्षक संघ नए निर्देश को अव्यवहारिक बताकर विरोध कर रहा है तो कांग्रेस का आरोप है कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने ऐसे कदम उठा रही है। वहीं सरकार का कहना है कि ये फैसला व्यवस्था सुधार की दिशा में बड़ा कदम है। स्कूल शिक्षा मंत्री दावा है कि कई प्राचार्यों ने खुद ही बच्चों को पढ़ाने की इच्छा जाहिर की है।

New rules for Principals in Chhattisgarh: प्रदेश के स्कूलों का इंफ्रास्ट्रकचर बेहतर हो, शिक्षकों की कमी दूर हो, अनुभवी शिक्षक बच्चों को बेहतर शिक्षा दें ताकि उनका भविष्य मजबूत हो। दोनों पक्ष जब इस बात पर सहमत हैं तो फिर नए निर्देश पर बहस क्यों? सवाल ये भी कि क्या प्राचार्यों के क्लास लेने से सरकारी स्कूलों की पढ़ाई सुधरेगी? या फिर ये अपनी कमी छिपाने का तरीका मात्र है ? विरोध के पीछे व्यवहारिक पक्ष है या काम ना करने का बहाना?

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