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CG Politics News: रायपुर: 31 मार्च 2026 के बाद अब आगे क्या? क्या नक्सल हिंसा पर लगाम कसने के साथ-साथ नक्सलवाद यानि नक्सलियों की सोच पर भी प्रहार हो सका है। विपक्ष बार-बार इस बात पर जोर देकर याद दिला रहा है कि नक्सलियों का इतिहास रहा है, पूर्व पीसीसी चीफ धनेंद्र साहू ने नसीहत देते हुए कहा कि- आज भी बहुत से अननोन नक्सली और (CG Politics News) उनके समर्थक गांव और शहरों में छिपे हैं,उनके खात्मे के बिन नक्सलियों के सफाए का दावा करना बेमानी है।
इधऱ, देश और प्रदेश के गृहमंत्री ने बार-बार जोर देकर कहा है कि 31 मार्च तक का टार्गेट नक्सल हिंसा से मुक्ति का है, (CG Politics News) इसके बाद भी एक झटके में सबकुछ नहीं बदल सकता, विचारधारा पर प्रहार जारी रहेगा, नक्सलवाद की सोच और समर्थन करने वालों को अब ये खुद तय करना है कि वो किसके साथ हैं?
वैसे असल सवाल यही है,.31 तारीख के बाद क्या बस्तर का विकास किस रफ्तार से होगा और क्या नक्सली फिर सिर तो ना उठाएंगे? इसे लेकर निश्चित तौर पर सरकार भी फिक्रमंद है, फोर्सेज की तैयारी है लेकिन शहर-शहर, समाज में छिपे नक्सल थिंक टैंक्स और समर्थकों की हर हरकत की मुस्तैद निगरानी का जिम्मा किसका होगा? (CG Politics News) नक्सली सोच पर प्रहार का जिम्मेदारी कौन लेगा?
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