Vishnu Ka Sushasan: बुद्धिजीवी रखेंगे विचार, दिखेगा शब्दों का चमत्कार, ‘रायपुर साहित्य उत्सव’ में साहित्यिक विरासत को मिलेगा नया मंच, साय सरकार का सराहनीय कदम

'रायपुर साहित्य उत्सव' में साहित्यिक विरासत को मिलेगा नया मंच, Raipur Literature Festival Organised from January 23

Vishnu Ka Sushasan: बुद्धिजीवी रखेंगे विचार, दिखेगा शब्दों का चमत्कार, ‘रायपुर साहित्य उत्सव’ में साहित्यिक विरासत को मिलेगा नया मंच, साय सरकार का सराहनीय कदम

Raipur Literature Festival Organised

Modified Date: January 22, 2026 / 12:03 am IST
Published Date: January 21, 2026 11:58 pm IST

रायपुरः Raipur Literature Festival छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण कर लिए हैं। इन दो वर्षों को राज्य की राजनीति और प्रशासन में स्थिरता, निर्णय क्षमता और जनहितकारी नीतियों के लिए याद किया जा रहा है। साय सरकार ने सत्ता संभालते ही “सुशासन” को केंद्र में रखते हुए विकास की दिशा तय की। एक और जहां विकास के काम तेजी से हो रहे हैं तो दूसरी ओर साहित्य, भाषा और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए काम हो रहे है। पिछले दो वर्षों में साय सरकार ने छत्तीसगढ़ की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए कई अहम पहल की हैं। इसी तारत्मय में अब राजधानी रायपुर में एक बड़ा साहित्यिक जलसा होने जा रहा है।

छत्तीसगढ़ सांस्कृतिक और साहित्यिक दृष्टि से भी समृद्ध राज्य है। यहां लोककला, लोकभाषा और साहित्य की एक सशक्त परंपरा रही है, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे अपेक्षित पहचान अब तक नहीं मिल पाई है। आज डिजिटल युग में युवाओं का रुझान पढ़ने-लिखने से कम होता जा रहा है। चूंकि साहित्य किसी भी समाज की आत्मा होता है। बौद्धिक चेतना को जागृत करने का सशक्त माध्यम होता है। इससे लेखकों, कवियों, चिंतकों और पाठकों को एक साझा मंच मिलता है। ऐसे में इस तरह के साहित्य महोत्सव की आवश्यकता महसूस लंबे समय से की जा रही थी। साय सरकार ने इसका बीड़ा उठाया और राजधानी में छत्तीसगढ़ की समृद्ध साहित्यिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक परंपरा को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करने के उद्देश्य से 23, 24 एवं 25 जनवरी 2026 को रायपुर साहित्य उत्सव कराने का फैसला किया।

तीन दिनों में कुल 42 सत्रों का आयोजन

Vishnu Ka Sushasan: रायपुर साहित्य उत्सव में देश एवं प्रदेश के लगभग 120 ख्यातिप्राप्त साहित्यकार, बुद्धिजीवी और रचनाकार सहभागिता करेंगे। तीन दिनों में कुल 42 सत्रों का आयोजन किया जाएगा, जिनमें समकालीन सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक विषयों पर गहन विमर्श होगा। उत्सव में लेखिका एवं पत्रकार शिखा वार्ष्णेय, लेखक एवं कवि कमलेश कमल, डॉ. गोपाल कमल तथा नवगीत के शिखर पुरुष डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर करेंगे। साहित्यिक सत्रों में मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी के संचालक विकास दवे, सुप्रसिद्ध लेखक अजय के. पांडे (बेस्टसेलर कृति ‘यू आर माई बेस्ट वाइफ’ के रचयिता), प्रसिद्ध उपन्यासकार इंदिरा दांगी, लेखिका सु सोनाली मिश्र, हिन्दी साहित्य की विदुषी जय रॉय, चर्चित फोटोग्राफर एवं लेखिका डॉ. कायनात काज़ी तथा लेखक-वक्ता अनिल पांडेय सहभागिता करेंगे। रायपुर साहित्य उत्सव के लिए अब तक 10,000 से अधिक साहित्य प्रेमी पंजीकरण करवा चुके हैं। जिन साहित्य प्रेमियों का पंजीकरण अब तक नहीं हो पाया है, वे आयोजन स्थल पर भी पंजीकरण करवा सकेंगे।

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नए साहित्यिक अध्याय की ओर बढ़ रहा रायपुर (Raipur Literature Festival)

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर, जहां संस्कृति और साहित्य की समृद्ध परंपरा सदियों से जीवित रही है, वो अब साय सरकार के प्रयासों से एक नए साहित्यिक अध्याय की ओर बढ़ रहा है। साय सरकार ने यह समझा कि साहित्य सिर्फ कला का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की सोच, पहचान और संवेदनशीलता का दर्पण है। रायपुर साहित्य उत्सव का आयोजन राज्य में साहित्यिक चेतना को जगाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उत्सव न केवल छत्तीसगढ़ी भाषा और साहित्य को सम्मान देगा, बल्कि हिंदी, अन्य भारतीय भाषाओं और क्षेत्रीय साहित्य को भी मंच प्रदान करेगा। साय सरकार का साहित्य के प्रति यह सकारात्मक दृष्टिकोण और सक्रिय समर्थन रायपुर को साहित्यिक चेतना का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। साहित्य उत्सव के माध्यम से साहित्य को जन-जन तक पहुंचाने की यह पहल राज्य की सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने के साथ-साथ नई पीढ़ी में साहित्य प्रेम को भी जगाने का काम करेगा।

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लेखक के बारे में

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