CG Politics News/Photo Credit: IBC24
CG Politics News: रायपुर: बीते सप्ताह संसद के विशेष सत्र में 131 वां संविधान संशोधन विधेयक गिरने के बाद से बीजेपी सदन से सड़क तक विपक्षी दलों खासकर कांग्रेस को इसका जिम्मेदार ठहराते हुए महिला विरोधी, आरक्षण विरोधी बता रही है। जवाब में कांग्रेस ने भी दलीलें सोच रखी हैं। मुद्दा देश की आधी आबादी से जुड़ा है। (CG Politics News) छत्तीसगढ़ में भी महिला आरक्षण पर बीजेपी ने कांग्रेस को पहले सड़क पर और अब सदन में घेरने की रणनीति बना ली है। संसद में महिला आरक्षण से जुड़ा 131 वां संशोधन बिल गिरने पर कल सड़क पर महिला आक्रोश रैली निकालने के बाद अब प्रदेश BJP सरकार, कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने विधानसभा का 1 दिन का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने ऐलान किया है कि, छत्तीसगढ़ सरकार विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव लाएगी। सदन में बताया जाएगा कि कैसे कांग्रेस ने देश की महिलाओं के साथ धोखा किया, विपक्ष ने महिलाओं के साथ अन्याय किया है। कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ने महिला आरक्षण को रोका, (CG Politics News) देश भर की महिलाएं कांग्रेस के खिलाफ आक्रोशित हैं।
CG Politics News: जाहिर है विपक्ष महिला विरोधी, आरक्षण विरोधी होने का टैग अफोर्ड नहीं कर सकता, सो नेता प्रतिपक्ष डॉ चरण दास महंत ने मोर्चा संभाला। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने राज्य सरकार के विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने और कांग्रेस के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करने की मांग पर कहा कि, राज्य सरकार विधानसभा का विशेष सत्र एक के बजाय दो दिन का बुलाए। एक दिन हमारी यानि कांग्रेस की निंदा कर ले, लेकिन दूसरे दिन हमें यानि कांग्रेस को भी सच बताने का मौका दे।
नेता प्रतिपक्ष की मांग पर प्रदेश सरकार की तरफ से मोर्चा संभाला कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने डॉ महंत पर चुटकी लेते हुए तंज कसा कि नेता प्रतिपक्ष डॉ महंत मजबूरी का शिकार, (CG Politics News) एक तो वो कांग्रेस की रीति-नीति,नेतृत्व से दुखी हैं, ऊपर से भाभीजी सांसद हैं। यानि भाभी और भूपेश दोनो के दोहरे दबाव में हैं,
CG Politics News: ये विशेष सत्र और निंदा के दाग से बचने दी जा रही दलीलें। जाहिर है कोई भी दल महिला विरोधी होने का टैग झेलने की स्थिति में नहीं है। मौजूदा दौर में झेल नहीं सकता, क्योंकि महिलाएं हर एक चुनाव में गेम चेंजर साबित हो रहीं है, यानि आधी आबादी की नाराजगी किसी भी दल को महंगी पड़ सकती है।
साफ है कि अब लड़ाई सदन में होगी तो पक्ष-विपक्ष दोनों के तर्क, बयान, (CG Politics News) तथ्य सबकुछ विधानसभा के रकॉर्ड पर दर्ज होगा। सदन में बीजेपी, कांग्रेस को महिला विरोधी, आरक्षण विरोधी साबित करेगी तो विपक्ष साबित करेगा कि महिला आरक्षण बिल तो 2023 में ही पास हो चुका है, मोदी सरकार तो केवल सियासी ऐजेंडा पूरा करने परिसीमन चाहती थी जिसे विपक्ष ने रोका है।
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