Reported By: Rajesh Mishra
,Chhattisgarh Congress on Amit Shah || Image- IBC24 News File
रायपुर: अपने तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भूपेश सरकार में नक्सलियों को प्रश्रय दिया था। इस बयान पर सियासत गरमा गई है। (Chhattisgarh Congress on Amit Shah) कांग्रेस ने इस बयान पर घोर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह झीरम हत्याकांड में शहीद हुए उनके नेताओं और जवानों का अपमान है। बैज ने कहा कि ये वही अमित शाह हैं जिन्होंने भूपेश सरकार में नक्सलवाद को लेकर किए जा रहे कामों की तारीफ की थी।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को रायपुर में एक कार्यक्रम में व्याख्यान देते हुए कहा कि भूपेश बघेल की सरकार ने नक्सलवाद को प्रश्रय दिया है। इसका समर्थन करते हुए कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि कांग्रेस जब-जब सत्ता में आई है, तब-तब आतंकवादी नक्सलियों को संरक्षण मिला है। अमित शाह नक्सलियों के समूह नाश के लिए काम कर रहे हैं। 31 मार्च से पहले उनका कमिटमेंट पूरा हो जाएगा।
कांग्रेस ने अमित शाह के इस बयान पर घोर आपत्ति जाहिर की है। पूर्व मंत्री शिव डहरिया ने कहा कि अमित शाह का यह बयान गैरजिम्मेदाराना है। हमारी सरकार के समय माओवाद पर अंकुश लगा, उनके कार्यकाल में माओवाद चरम सीमा पर था। झीरम सहित सारी बड़ी घटनाएं भाजपा के कार्यकाल में हुईं। हमने बस्तर के आदिवासियों को रोजगार उपलब्ध कराया, हमने उन्हें जल-जंगल-जमीन का अधिकार दिलवाया। हमने अपने कार्यकाल में माओवाद को खत्म करने की पुरजोर कोशिश की, जिसका परिणाम है कि आज भाजपा को इसमें सफलता मिल रही है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि ये वही केंद्रीय मंत्री अमित शाह हैं जिन्होंने हमारी सरकार की तारीफ करते हुए कहा था कि नक्सल क्षेत्र में सरकार अच्छा काम कर रही है। (Chhattisgarh Congress on Amit Shah) शाह का यह बयान कि भूपेश सरकार ने नक्सलवाद को प्रश्रय दिया, झीरम कांड में मारे गए हमारे शहीदों का अपमान है। हमारे कार्यकाल में नक्सलवाद को लेकर जो काम हुआ, उसका परिणाम है कि ये आज नक्सलवाद के खात्मे का दावा कर रहे हैं। 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को खत्म करने के दावे के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान ने नक्सलवाद को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।
गौरतलब है कि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को रायपुर में कहा था कि देश को जल्द से जल्द ‘‘विनाशकारी’’ कम्युनिस्ट विचारधारा से छुटकारा पाने की जरूरत है और उन्होंने नक्सलियों से हथियार डालने की अपील की। शाह ने कहा था कि सरकार आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों का लाल कालीन बिछाकर स्वागत करेगी।
नवा रायपुर में ऑर्गनाइजर वीकली के ‘छत्तीसगढ़@25 शिफ्टिंग द लेंस’ शीर्षक से आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि माओवादी समस्या को विकास की कमी से नहीं जोड़ा जा सकता और न ही इसे केवल कानून-व्यवस्था का मुद्दा माना जा सकता है। उन्होंने कहा, ‘‘वामपंथी उग्रवाद की समस्या एक विचारधारा से प्रेरित चुनौती है।’’ शाह ने कहा कि भारत की जनता को इस विचारधारा की सच्चाई को समझना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘जहां कहीं भी कम्युनिस्ट सत्ता में रहे, वे विकास नहीं ला सके। कम्युनिस्ट विचारधारा विनाश की विचारधारा है और देश को इससे तुरंत छुटकारा पाना आवश्यक है।’’
शाह ने कहा कि लोकतांत्रिक राजनीति में अब कम्युनिस्ट विचारधारा का कोई अस्तित्व नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘ त्रिपुरा और बंगाल में अब इसका अस्तित्व नहीं है। केरल में यह कुछ हद तक मौजूद है; हालांकि, तिरुवनंतपुरम से लोगों ने बदलाव की शुरुआत कर दी है।’’ (Chhattisgarh Congress on Amit Shah) उन्होंने माओवादियों से हथियार डालने की अपील करते हुए कहा कि सरकार एक भी गोली नहीं चलाना चाहती और आत्मसमर्पण करने वालों का ‘‘लाल कालीन’’ बिछाकर स्वागत करेगी। शाह ने नक्सलवाद के मुद्दे पर छत्तीसगढ़ के पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाते हुए, उनपर नक्सलवाद को प्रश्रय देने का आरोप भी लगाया था।