Chhattisgarh Dharma Swatantrya Amendment Bill 2026 || Image- Symbolic (Canva)
रायपुर: छत्तीसगढ़ विधान सभा में धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक पेश कर दिया गया है। (CG Dharma Swatantrya Amendment Bill 2026) यह बिल उप-मुख्यमंत्री सह गृहमंत्री विजय शर्मा ने पटल पर रखा। हालांकि कांग्रेस ने फिर से इस विधेयक का विरोध किया है।
सदन में नेता प्रतिपक्ष और दिग्गज कांग्रेस विधायक डॉ चरणदास महंत ने विरोध में सुर बुलंद करते हुए कहा कि, देशभर के 11 राज्यों में इसी तरह के बिल लंबित है, उनपर फैसला नहीं हो सका है। ऐसे में इस पर चर्चा नही होनी चाहिए। डॉ महंत ने मांग किया कि, इस बिल को पहले विधान सभा की प्रवर समिति को सौंपना चाहिए।
धर्म स्वतंत्र विधायक पर विपक्ष की आपत्ति को खारिज कर दिया और गृह मंत्री को विधेयक प्रस्तुत करने के लिए दी अनुमति दे दी। इस कदम से नाराज विपक्ष ने दिन भर के लिए सदन की कार्यवाही का किया बहिष्कार कर दिया।
कांग्रेस विधायको के बहिष्कार पर सत्ता पक्ष ने तंज कसते हुए कहा, यह पलायन है। आपको आदिवासी समाज की पीड़ा से मतलब नहीं है। विपक्ष के विधायकों के खिलाफ शेम-शेम के नारे भी लगाए गये।
वही इससे पहले शून्यकाल में विपक्ष ने SIR पर स्थगन प्रस्ताव लाया था। नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा कि 19 लाख से ज्यादा लोग लापता है। चूंकि सभी लापता थे इसलिए इनका नाम मतदाता सूची काटा गया है। (CG Dharma Swatantrya Amendment Bill 2026) डॉ महंत ने हैरानी जताते हुए पूछा कि, ये कभी प्रदेश के नागरिक थे, ये कहां चले गए? इनके बारे में न पुलिस, न सरकार को चिंता है। इसी तरह बस्तर में 1 लाख लोग सलवा जुडूम के नाम पर लापता है। सरकार को उनकी भी चिंता नहीं है।
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026 एक प्रस्तावित कानून है। इसका उद्देश्य राज्य में जबरन या अवैध धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। इस विधेयक को राज्य सरकार ने मंजूरी दी थी और आज इसे विधानसभा में पेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लाया जा रहा है।
विधेयक के मुख्य नियम और दंड के तहत अवैध धर्मांतरण को बल, प्रलोभन, दबाव, कपट और डिजिटल माध्यम से परिभाषित किया गया है। विधेयक स्पष्ट करता है कि अपने पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। इस प्रकार का अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा, (CG Dharma Swatantrya Amendment Bill 2026) जिसकी सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।
अवैध धर्मांतरण के लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान इस प्रकार है: सामान्य अवैध धर्मांतरण के लिए 7 से 10 वर्ष की जेल और 25 लाख रुपये से अधिक जुर्माने का प्रावधान है।
नाबालिग, महिला, SC/ST/OBC के प्रति किए गए अपराध में 10 से 20 वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये से अधिक जुर्माना तथा सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 10 वर्ष से अधिक आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये से अधिक जुर्माना शामिल है।
स्वैच्छिक धर्मांतरण की प्रक्रिया में व्यक्ति द्वारा सूचना देना, (CG Dharma Swatantrya Amendment Bill 2026) जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देना और 30 दिनों तक सार्वजनिक सूचना देना शामिल है।
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