CG Dharmantaran Kanoon 2026: : छत्तीसगढ़ में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू होने का रास्ता साफ़, राज्यपाल ने लौटाया 2006 का पुराना विधेयक

Chhattisgarh Dharmantaran Kanoon 2026: छत्तीसगढ़ में धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 का रास्ता साफ, राज्यपाल ने पुराना कानून लौटाया, मतांतरण रोकने नया कानून जल्द।

CG Dharmantaran Kanoon 2026: : छत्तीसगढ़ में नया धर्म स्वातंत्र्य कानून लागू होने का रास्ता साफ़, राज्यपाल ने लौटाया 2006 का पुराना विधेयक

Chhattisgarh Freedom of Religion Law 2026 || Image- IBC24 News File

Modified Date: March 16, 2026 / 02:04 pm IST
Published Date: March 16, 2026 12:56 pm IST
HIGHLIGHTS
  • राज्यपाल ने 2006 का धर्म स्वातंत्र्य कानून लौटाया
  • नया धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 लागू होने का रास्ता साफ
  • मतांतरण रोकने के लिए सख्त प्रावधान प्रस्तावित

Chhattisgarh Dharmantaran Kanoon 2026: रायपुर: प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर हो रहे धर्मांतरण के मद्देनजर साय सरकार ने राज्य में धर्म स्वतंत्रता से जुड़े नए विधेयक लाने का दावा किया था। वहीं आज इस नए कानून का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल ने पुराना धर्म स्वातंत्र्य कानून वापस लौटा दिया है। यह कानून 20 साल पुराना है, जो 2006 में पूर्ववर्ती डॉ. रमन सिंह की सरकार के दौरान लाया गया था। इस पुराने विधेयक के वापस होने के बाद नए विधेयक के लिए रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है।

मंत्रिमंडल ने मंजूर किया था नया कानून

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह हुई मंत्रिमंडल की बैठक में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अगुवाई में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026 के प्रारूप को मंजूरी दे दी गई थी। इस विधेयक का उद्देश्य राज्य में एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए बल प्रयोग, प्रलोभन, कपटपूर्ण नीति व साधनों, अनुचित प्रभाव या मिथ्या निरूपण पर प्रभावी ढंग से रोक लगाना है। प्रस्तावित कानून के अनुसार स्वैच्छिक मतांतरण करने वाले व्यक्ति को कम से कम 60 दिन पहले जिला मजिस्ट्रेट को लिखित सूचना देना अनिवार्य होगा।

इन जिलों में सामने आ चुके है मतांतरण के मामले

Chhattisgarh Dharmantaran Kanoon 2026: बता दें कि पिछले कुछ समय से राजनांदगांव, रायपुर, दुर्ग, कांकेर, बलरामपुर, बिलासपुर, नारायणपुर, जीपीएम, सरगुजा, सूरजपुर, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, बालोद, धमतरी, कबीरधाम और जशपुर में कई धर्मांतरण और मतांतरण के मामले सामने आ चुके हैं। खुद हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों पर टिप्पणी करते हुए इन्हें ‘सामाजिक खतरा’ बताया था।

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