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रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के नवा रायपुर स्थित तुता धरना स्थल पर मिड-डे मील योजना के तहत सरकारी स्कूलों में काम करने वाली रसोइयों की अनिश्चितकालीन हड़ताल अब गंभीर मानवीय संकट में बदलती नजर आ रही है। धरने के दौरान दो महिला रसोइयों की मौत हो चुकी है, जबकि एक अन्य की हालत नाजुक बताई जा रही है। खुले आसमान के नीचे, एक पर्दे के सहारे छोटे बच्चों के साथ सो रही महिलाओं की बदहाली ने प्रशासन और सरकार की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
रसोइया संघ के अध्यक्ष राम राज कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि धरना स्थल पर मौजूद प्रदर्शनकारियों में से दो महिलाओं की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक महिलाओं में दुलारी यादव, शासकीय प्राथमिक शाला सलधा की रसोइया थीं। 25 जनवरी को अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां 27 जनवरी दोपहर करीब तीन बजे उनकी मौत हो गई। दूसरी मृतक रुक्मणी सिन्हा ग्राम कुसुम कसाव, जिला बालोद की रहने वाली थीं। दोनों महिलाओं को सर्दी, खांसी, तेज सिरदर्द और संक्रमण की शिकायत थी।
धरना स्थल के हालात को लेकर रसोइया संघ ने गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ का कहना है कि प्रदर्शन स्थल पर पीने के लिए साफ पानी तक की व्यवस्था नहीं है। नहाने, शौचालय और दैनिक जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। ठंड और मौसम की मार से बचने के लिए न तो पर्याप्त तंबू हैं, न कंबल और न ही पक्की छत की व्यवस्था। इन हालात में महिलाएं छोटे-छोटे बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। कई महिलाएं अपनी आपबीती बताते हुए फूट-फूटकर रो पड़ीं और साफ शब्दों में कहा कि “दो लाशें जा चुकी हैं, आगे भी जा सकती हैं, लेकिन मरते दम तक यहीं रहेंगे।”
संघ का दावा है कि बीते 30 वर्षों में रसोइयों की मजदूरी महज 15 रुपये प्रतिदिन से बढ़कर 65-66 रुपये तक पहुंची है, जो आज के समय में न सिर्फ अपर्याप्त है बल्कि कलेक्टर दर की मजदूरी से भी कहीं कम है। इसी मांग को लेकर रसोइया संघ 29 दिसंबर 2025 से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर बैठा है।
हड़ताल का असर राज्यभर में देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ के हजारों सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील योजना प्रभावित है, जिससे लाखों बच्चों का पोषण भी खतरे में पड़ गया है।